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    विसंगतियों की भेंट चढ़ी काउंसिलिंग, पूर्व स्वीकृत पद गायब, परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों के भविष्य पर लटकी तलवार

    श्योपुर 28/07/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> ज़िले के उत्कृष्ट और मोडल स्कूलों में पदस्थी के लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया शनिवार को आयोजित हुई। शासन के निर्देशानुसार सम्पन्न काउंसिलिंग प्रक्रिया में विधिवत परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों की भागीदारी रही। निषादराज भवन में आयोजित काउंसिलिंग की अध्यक्षता अपर कलेक्टर राजेन्द्र राय ने की। काउंसिलिंग की यह कवायद शुरुआती दौर से विसंगतिपूर्ण रही। जिसने शासन की मंशा और प्रक्रिया के बीच की सच्चाई को उजागर किया। सबसे बड़ी आपदा की स्थिति ज़िला मुख्यालय स्थित उत्कृष्ट स्कूल में बनती दिखाई दी। जहां के पूर्व स्वीकृत 7 पद नोटिस बोर्ड व प्रक्रिया से नदारद रहे। लिहाजा उन पदों के लिए पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक अधर झूल होते दिखाई दिए। ज्ञातव्य है कि उक्त सातों शिक्षक पूर्व से इसी स्कूल में पदस्थ थे। पद अकारण विलोपित होने की वजह से उनके भविष्य पर तलवार लटक गई है। कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन के अवकाश पर होने की स्थिति भी काउंसिलिंग को होंच-पॉंच बनाने का सबब बनी। उनके द्वारा अधिकृत अपर कलेक्टर श्री राय खुद नियम-विधानों के पेंच को लेकर असमंजस में दिखाई दिए। लिहाजा सारी कवायद में डीईओ अजय कटियार का पलड़ा भारी दिखाई देता रहा। गौरतलब है कि शासन ने डीईओ को केवल इस प्रक्रिया की व्यवस्था करने की ही जवाबदेही सौंपी थी। प्रभारी कलेक्टर व सीईओ ऋषि गर्ग कार्रवाई समाप्त होने की अवधि से महज 20 मिनट पहले निषादराज भवन पहुंचे। इससे पहले सारी कवायद आनन-फानन में निपटाते हुए अभ्यर्थियों को चलता किया जा चुका था। उक्त कार्रवाई में डाइट प्राचार्य राघवेंद्र सिकरवार, बीईओ अशोक कुमार खंडेलवाल, ज़िला पंचायत के एपीसी शम्भूदयाल शर्मा तथा अशासकीय शिक्षाविद के तौर पर समाजसेवी कैलाश पाराशर की भागीदारी रही। माना जा रहा है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाने के नाम पर ध्वस्त करने वाली इस प्रक्रिया को लेकर विरोध के स्वर और तेज़ होते सुनाई देंगे। ऐसे में यदि अब तक की कवायद कानूनी दाँव-पेंच में उलझ जाए तो ताज्जुब नहीं किया जाना चाहिए।
     आखिर कहां गायब हुए उत्कृष्ट स्कूल के 7 पद.....
                  प्रक्रिया को लेकर विवाद की बड़ी वजह बने उत्कृष्ट शाला में यूडीटी के 7 पद जो पहले से स्वीकृत होकर भी लुप्त दिखे। इनमें 4 पद सामाजिक विज्ञान व 3 पद विज्ञान संकाय के थे। सवाल यह खड़ा हुआ कि 7 यूडीटी के अभाव में कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को उक्त विषय कौन पढ़ाएगा। उल्लेखनीय है कि उत्कृष्ट स्कूल में 9वीं और 10वीं में छात्र संख्या क्षमता से अधिक है। जिनके मांन से ज़रूरत पदों को गायब करने के बजाय और बढाए जाने की थी। स्पष्ट है कि यूडीटी के तौर पर सेवाएं देने वाले सातों शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के बाद सम्बद्ध विषय की पढ़ाई पूरी तरह ठप्प हो जाएगी। अन्याय उन शिक्षको के साथ भी होगा जो पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी घर और घाट कहीं के नहीं बचे हैं।
     जताया विरोध, दर्ज़ कराई आपत्ति पर नहीं हुई सुनवाई.....
               पदों को लुप्त किए जाने से उपजी समस्या के खिलाफ संबंधित शिक्षकों ने अपर कलेक्टर तथा पैनल के समक्ष अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई। यह अलग बात है कि सक्षम प्रशासनिक अधिकारी की गैरमौजूदगी में उनके विधि-सम्मत दावों और तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया गया। यह अलग बात है कि एन वक़्त पर पहुंचे सीईओ ऋषि गर्ग ने एक शिक्षिका के साथ ज़रूर न्याय किया। अडूसा में पदस्थ विज्ञान की शिक्षिका पूनम सेन पीएससी की मुख्य परीक्षा से फारिग होने के बाद दौड़-धूप कर ग्वालियर से श्यीपुर पहुंची थी। प्रक्रिया खत्म होने से 20 मिनट पहले पैनल के सामने पहुंची शिक्षिका को पद भर जाने की बात कह कर गुमराह करने का प्रयास किया गया। संयोग से मौके पर पहुंचे सीईओ श्री गर्ग ने माजरा भांपते हुए पैनल को लताड़ लगाई और शिक्षिका को पात्रतानुसार मॉडल स्कूल के लिए च्वाइस देने का मौका मिल गया। इस दौरान सीईओ ने सख्त तेवर दिखाते हुए निलंबित करने और प्रक्रिया को निरस्त कराने की चेतावनी भी दी। विसंगति का शिकार हुए शिक्षकों का मानना है कि प्रक्रिया प्रभारी कलेक्टर की अध्यक्षता में होती तो सारी विसंगति खुद-बखुद उजागर हो जाती। जिस पर धूल डालने का काम आखिरी वक्त तक किया गया।

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