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    अवैध कॉलोनी बसाने के मामले में कई अधिकारी-कर्मचारियों पर गिर सकती गाज


    भिण्ड(rubarudesk) @www.rubarunews.com>> अवैध कॉलोनी मामले में थोक में हो रही एफआईआर के बाद इस मामले में कई अधिकारी कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि कृषि योग्य भूमि पर कॉलोनी काटकर प्लाट व मकान विक्रय करने में मददगार बने उन अधिकारी-कर्मचारियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। इन अवैध कॉलोनियों में प्रॉपर्टी क्रय विक्रय के समय किए गए रजिस्टरी व नामांतरण आदि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले अधिकारी भी इस लपेटे में आ सकते हैं। प्रशासन ने इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन प्रशासन इससे इनकार भी नहीं कर रहा है। इस मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका की पैरवी करने वाले एड. उमेश बोहरे से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मामले में उन सब पर एफआईआर हो रही है जिन्होंने यह अवैध कॉलोनी काटी हैं और इसके बाद उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने अवैध कॉलोनी में विक्रय की गई प्रॉपर्टी की रजिस्टरी व नामांतरण आदि की प्रक्रिया बिना जांच पड़ताल के पूरी करा दी। इतना ही नहीं कई लोगों ने तो पूरी तरह से अनुमति लेकर भवन निर्माण कराए और उन्हें यह परमीशन देने वाले अफ्सर भी कार्रवाई का शिकार होंगे।
    कई रसूखदारों पर हो रही एफआईआर
            जिले भर की 209 अवैध कॉलोनी मामले मेंं सैंकड़ों प्रकरणों में हजारों एफआईआर हो रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खास लोगों में शामिल किरार समाज के अध्यक्ष डॉ. गुलाब सिंह किरार व उनके अपनों पर प्रकरण दर्ज हो रहे हैं वहीं इसमें शहर के प्रतिष्ठित वीरेन्द्र सिंह आदि बड़े नाम है जो अवैध कॉलोनी बसाने में शामिल रहे। इस मामले में करीब 1500 से अधिक लोगों पर प्रकरण दर्ज करने के लिए आवेदन थानों में पहुंच गए हैं।
    हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जागा प्रशासन
             इस मामले पर ग्वालियर हाई कोर्ट में दायर कराई गई जनहित याचिका पर वर्ष 2012 में कोर्ट ने इन कॉलोनियों को अवैध माना और कार्रवाई के आदेश जिला प्रशासन को दिए, लेकिन कोर्ट के आदेश की अंदेखी करने पर हाल ही में प्रशासन को हाई कोर्ट की फटकार लगी तो प्रशासन हरकत में आया और अवैध कॉलोनी बसाने वालों पर मामले दर्ज कराने के आदेश दिए गए।
    वर्ष 2012 के बाद के अधिकारी पर गिरेगी गाज
             यह भी बात सामने आई है कि हाईकोर्ट के आदेश की अंदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। कोर्ट ने वर्ष 2012 में इस मामले पर आदेश सुना दिया था और कार्रवाई की बात की थी, लेकिन अधिकारियों ने इसकी अंदेखी की और कोर्ट के आदेश को धता बता दिया। इसलिए अब हाईकोर्ट इस पर सख्त है और इस आदेश के बाद से अब तक जिले में पदस्थ रहे अधिकारियों पर गाज गिरने की बात कही जा रही है। इसमें एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सभी निकाय सीएमओ आदि अधिकारी कोर्ट की सख्ती का शिकार हो सकते हैं।
    जुर्माना ठोककर किए प्रकरण दर्ज
            जिले के भिण्ड, मेहगांव, गोहद, लहार आदि थानों में हजारों के ऐसे नाम की सूची पहुंचाई जा चुकी है जिसमें इन पर अवैध कॉलोनी बसाने का आरोप है। इन पर लगातार प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं और साथ ही जुर्माना भी ठोका जा रहा है। इस कार्रवाई से जिले भर के भू-माफिया व अवैध कॉलोनी बसाने वालों के पसीने छूट गए हैं।
    कइयों को बचाने के प्रयास
            दना दन दर्ज की जा रही एफआईआर के बीच आरोप यह भी लग रहे हैं कि पुलिस अपने कुछ मुंह लगे लोगों को बचाने के प्रयास भी कर रही है, लेकिन इस पर एसपी रुडोल्फ अल्वारेस ने कहा कि कोई भी इस कार्रवाई से बच नहीं सकता है और पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग की जा रही है।

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