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    पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में थाना प्रभारी व स्टाफ की भूमिका संदिग्ध, सीबीआई जांच की रखी मांग की,


    भिण्ड 13/09/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> ऊमरी थाने में पुलिसकर्मियोंं पर हुए हमले को साधारण तौर पर लिया जा रहा है और इसकी जांच न होने के पीछे बड़ी साजिश बताई जा रही है। ऊमरी थाने में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले वर्ष 2016 में एक आरोपी ने हवालात में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी उस वक्त भी पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे, लेकिन बाद मेंं मामला रफादफा कर दिया गया। ऊमरी पुलिस की भूमिका फिर एक बार सवालों में है और पुलिसकर्मियों पर थाने के भीतर हुए हमले में प्रधान आरक्षक उमेश बाबू की मौत पर उसके परिजनों ने थाना प्रभारी और अन्य स्टाफ की भूमिका को संदिग्ध बताया है और पूरे मामले को रेत के गठजोड़ से भी जोड़ा है। उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की है। यह मामला जिस तरह से साधारण तौर पर लिया जा रहा है, उससे साफ जाहिर हो रहा है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का थाना प्रभारी सीपीएस चौहान को संरक्षण है। अगर ऐसा नहीं होता तो अब तक इस थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई हो गई होती, क्योंकि यह मामला इस स्तर का नहीं है कि इसे अंदेखा किया जा सके।
    प्रधान आरक्षक के पुत्र ने यह उठाए सवाल
              प्रधान आरक्षक उमेश बाबू के पुत्र ने अपने पिता की मौत के बाद कहा कि इस पूरे प्रकरण में अजीब बात यह है कि जिस वक्त उसके पिता व एक अन्य पुलिसकर्मी गजराज पर हमला हुआ तब थाने में सिर्फ यह दो लोग थे, जबकि अब तक यह सामने नहीं आ पाया है कि अन्यस्टाफ कहां गया था और उस वक्त थाना प्रभारी कहां थे, इस बारे में भी अब तक नहीं बताया गया है। इतना ही नहीं उन्होंने इस प्रकरण को जाति से जोडक़र भी बताया। साथ ही रेत कारोबारियों पर भी इस घटना का आरोप लगाया।
    अब तक तय नहीं की जिम्मेदारी
              इस पूरे प्रकरण पर पुलिस अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं और अब तक न तो किसी जांच की बात की गई है और न ही किसी तरह की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे साफ है कि पूरे मामले को रफादफा करने के प्रयास हो रहे है। इस मामले में ऊमरी थाना प्रभारी सीपीएस चौहान की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है, लेकिन उनके विरुद्ध किसी तरह कार्रवाई नहीं की गई है।
    रेत के गठजोड़ की चर्चाएं जोरो पर
             यह बात किसी से छुपी नहीं है की ऊमरी थाना क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार उच्च स्तर पर किया जा रहा है और इसमें पुलिस की मिली भगत भी बताई जाती है। इसलिए चर्चा है कि पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में भी रेत का अवैध कारोबार ही जिम्मेदार है और अब पुलिस इस पर पर्दा डालने के प्रयास में है।
    अवैध निरोध बना है इस घटना की वजह
            आरोपी विष्णू राजावत जिसने पुलिसकर्मियों पर हमला किया उसे पुलिस बाजार में हुडदंग मचान के आरोप में पकडक़र लाने का दावा कर रही है, लेकिन सूत्र बता रहे है कि आरोपी रेत के कारोबार से जुड़ा है और पुलिस ने उसे अवैध निरोध में थाने में बिठाकर रखा था और उसने मौका देखते ही पुलिसकर्मियों पर गैंती से हमला दिया बोल दिया और इसमें प्रधान आरक्षक की मौत की उपचार के दौरान मौत हो गई।
    2016 में हवालात में आरोपी ने की थी आत्महत्या
            ऊमरी थाना में वर्ष 2016 में गेहवद गांव निवासी रज्जन उर्फ सुनील यादव ने हवालात में आत्महत्या कर ली थी ओर बाद में पता चला कि पुलिस बाइक चोरी के आरोप में उसे उठाकर लाई थी और उसे अवैध निरोध में तीन दिन तक थाने में रखा गया। इस बीच उसके साथ उस वक्त के थाना प्रभारी रामबाबू यादव ने जमकर मारपीट की और अंत में उसने हवालात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में रामबाबू के साथ तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था।
    इनका कहना है:
             इस तरह के मामले में संतरी व एसएचओ की जिम्मेदारी बनती है, लेकिन थाना प्रभारी भी बराबर का हिस्सेदार होता है। इस मामले की जांच के बाद थाना प्रभारी व अन्य के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
    गुरुकरण सिंह, एड. एसपी भिण्ड।

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