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    मृतक के शरीर में दिखी हलचल,परिजनों ने चिकित्सकों पर लगाए आरोप, किया चक्का जाम


    भिण्ड09/09/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> युवक को मृत बताकर उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया और वहां उसके शरीर में हलचल दिखी तो उसे आनन फानन में ग्वालियर रैफर किया गया और रास्ते में उसकी मौत हो गई। यह आरोप मृतक युवक के परिजनों ने चिकित्सकों पर लगाते हुए जाम लगाकर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की। मामला प्रदेश के नम्बर-1 जिला अस्पताल का है और यहां के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगा है। बताया गया कि दबोहा गांव में आशीष कुमार शर्मा नाम के युवक को रविवार सुबह खेत में करंट लगा तो ग्रामीण उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर भागे। यहां चिकित्सकों ने उसकी जांच कर मृत घोषित कर शव को पीएम के लिए भिजवा दिया। तब तक परिजन भी आ गए और शव के पास पहुंचे तो उन्हें युवक के शव में हलचल दिखाई पड़ी। इसके बाद सूचना डॉक्टरों को दी गई तो युवक को ग्वालियर रैफर कर दिया गया और रास्ते में उसकी मौत हो गई। उधर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा कि मृतक के शरीर में आधे घंटे बाद अकडऩ आती है और उसे देखकर लोगों को लगता है कि उसके शरीर में जान है। इस भ्रम के चलते लोग डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाने लगते हैं। मृतक को रैफर करने के सवाल पर अस्पताल के सिविल सर्जन ने कहा कि परिजनों ने जबरन उसे रैफर करने के लिए कहा तो उन्हें संतुष्ट करने के लिए ऐसा करना पड़ा।
    आक्रोशित परिजनों ने लगाया जाम
             आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर जाम लगा दिया और चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। जानकारी लगते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। इसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से दबोहा मोड़ के पास नेशनल हाईवे-92 को भी जाम कर दिया और करीब दो घंटे तक जाम लगाकर कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग की जाती रही।
    चिकित्सकों पर घोर लापरवाही का लगाया आरोप
            मृतक के परिजनो ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों द्वारा आशीष को मृत घोषित कर दिया गया उसके बाद  भी उसकी सांसें चलती मिली, फिर भी उसे पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया गया और वहां उसका शव करीब ढेड़ से दो घंटे तक रखा रहा, इस बीच अगर उसे सही उपचार मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। इन आरोपों के बाद फिर एक बार मामले को रफादफा करने के लिए अस्पताल प्रबंधन जांच का राग अलाप रहा है।
    बिजली कंपनी की लापरवाही भी उजागर
              दबोहा गांव के खेत में बिजली की लाइन टूटी पड़ी थी और इसकी सूचना देने के बाद भी इसे दुरुस्त किए बिना ही बिजली शुरू कर दी गई। इस कारण रविवार सुबह जब युवक खेत पर काम करने गया तो वह इसकी चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गया। बिजली कंपनी की लापरवाही का यह पहला उदाहरण नहीं है इससे पहले भी कई जगह इस तरह के हादसे होते रहे हैं, फिर भी कंपनी के रवैए में कोई बदलाव नहीं आया है।
    वाहनों के थम गए पहिए
             नेशनल हाईवे-92 पर स्थित दबोहा मोड़ पर आक्रोशित ग्रामीणों ने जाम लगा दिया, इस दौरान हाइवे पर वाहनों के पहिए थम गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचाया गया और अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वास देकर जाम खुलवाया तब जाकर थमे पहिए चल सके।
    प्रबंधन ने यह दी सफाई
             इस मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अजीत मिश्रा ने कहा कि अक्सर मृतक के शरीर में करीब आधे घंटे बाद जो अकडऩ आती है उसे लोग समझ बैठते हैं कि मृतक के शरीर में जान है, जबकि ऐसा नहीं होता है। यह अकडऩ उसके मृत होने की पहचान होती है। इसीलिए अक्सर लोग चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगा बैठते हैं। चिकित्सक कभी भी किसी भी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने की गलती नहीं कर सकता, यह मात्र एक तरह का भ्रम है जो आमजन को समझना चाहिए।ं
    इनका कहना है
             जब वह जिला अस्पताल लाया गया तो उसकी मौत हो चुकी थी, चिकित्सकों ने उसकी पूरी जांच कर ही उसे मृत घोषित किया। उसके बाद जब परिजन जिद करने लगे कि ग्वालियर रैफर कर दो तो हमें उनकी संतुष्टी के लिए ऐसा करना पड़ा।
    -डॉ. अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल भिण्ड।

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