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    मृत घोषित करने के बाद बालक की धडक़नें चलने का किया दावा, परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा


    भिण्ड11/09/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> प्रदेश के नम्बर वन अस्पताल से तीने दिन के भीतर दो ऐसे मामले निकलकर सामने आए जिसमें जीवित व्यक्ति को मृत बताने का आरोप चिकित्सकों पर लगाया गया। मंगलवार को दो वर्षिय बालक ने खेल-खेल में जहरीला पदार्थ गटक लिया और उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि बालक को मृत घोषित करने के बाद जब उसके शरीर में हलचल हुई तो, फिर उसे डॉक्टरों के पास ले गए, लेकिन उन्होंने फिर भी उसे मृत ही बताया। इस मामले में परिजनों ने हंगामा किया और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांंग की। इससे पहले 9 सितम्बर को भी इसी तरह का मामला सामने आया था। जिसमें चिकित्सकों द्वार मृत घोषित किए गए युवक को जब पोस्ट मार्टम के लिए डेड़ हाउस पहुंचाया गया तो उसकी भी धडक़नें शुरू होने की बात की गई थी और चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगे थे। जीवित बालक को चिकित्सकों द्वारा मृत बताने के मामले पर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और डॉ. आरके अग्रवाल पर लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की। इस पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा फिर एक बार जांच का आश्वासन देकर जिम्मेदार डॉक्टर के विरुद्ध सख्त का कार्रवाई का भरोसा दिया गया है, लेकिन सवाल यह है कि इस तरह का आश्वासन और भरोसा कब तक दिया जाएगा, क्योंकि हर बार अपने बचाव में प्रबंधन इस तरह का रुख अपनाता है, लेकिन बात कार्रवाई की आती है तो यह किसी के विरुद्ध नहीं हो पाती है।
                सिविल सर्जन डॉ. अजीत मिश्रा का कहना है कि अस्पताल के चिकित्सक हर रोज 24 घंटे अपनी ड्यूटी जिम्मेदारी सेे निभा रहे है और चिकित्सक के अलावा कोई और कैसे बता सकता है कि व्यक्ति मृत है कि जीवित। उन्होंने यह भी बताया कि जब बालक को लाया गया तो वह मृत अवस्था में था और डॉक्टरों ने हर उस तरह से उसकी जांच की जैसे की जाती है उसके बाद उसे मृत घोषित किया गया। यह कोई पहला मामला नहीं है जब चिकित्सकों पर इस तरह के आरोप लगगे हो। इससे पहले भी 9 सितम्बर को दबोहा गांव के आशीष शर्मा नामक युवक को खेत में करंट लगा तो उसे अस्पताल लाया गया और यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया, लेकिन यहां उसकी सांसें चलने की बात की गई और डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर भी रैफर किया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई थी।
    किसी एक डॉक्टर के विरुद्ध भी नहीं हुई कार्रवाई
             जनता का आरोप है कि प्रदेश के नम्बर वन अस्पताल की सिर्फ बिल्डिंग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है और इसी साज-सज्जा के बल पर ही इस अस्पताल को नम्बर वन का खिताब दे दिया गया है। यहां दवाओं के टोटे के साथ ही डॉक्टरों की कमी तो है ही साथ ही अनुभवी चिकित्सकों के लिए भी जनता वर्षों से मुंह ताक रही है। इस पर एक अह्म बात जो सामने आई वह यह है कि आज तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी एक डॉक्टर के विरुद्ध भी लापरवाही के आरोप की न तो निष्पक्षता से जांच कराई और न ही किसी के विरुद्ध कार्रवाई की।

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