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    कंबल ख़ैरात का प्रतीक है सम्मान का नहीं : प्रणय

    श्योपुर 01/10/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> सम्मान का प्रतीक अंगवस्त्र या शॉल को माना जाता है। कंबल कभी भी शॉल का विकल्प नहीं हो सकता। कंबल सिर्फ मदद या ख़ैरात का परिचायक है। सम्मान के नाम पर कंबल बांटने वाली संस्थाओं को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए। वहीं अतिथि के रूप में जनप्रतिनिधि भी इस बात को समझें। उक्त वक्तव्य साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात प्रणय ने जारी किया। उन्होंने सोमवार को वृद्धजन दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में जुटे बुजुर्गों को कंबल बांटे जाने पर अप्रसन्नता प्रकट की। बीते साल की गलती को फिर से दोहराए जाने को भी उन्होंने शर्मनाक बताया। सामाजिक मूल्यों के प्रति सजग प्रभात प्रणय ने कहा कि सम्मान शब्द की गरिमा बुजुर्गों को भी समझनी होगी। ताकि उन्हें दयनीय और असहाय साबित करने वालों को अपनी धारणा बदलने पर बाध्य होना पड़े।
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