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    सुहाग की लंबी उम्र के लिए महिलाएं रखेंगी करवाचौथ का व्रत


    भिण्ड26/10/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सलामती के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और रात को चांद देखकर उसे अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। माना जाता है कि इस दिन यदि सुहागिन स्त्रियां व्रत रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखमय होता है। इस त्यौहार को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता हैं इस दिन अलग ही नजारा होता है। इसी के साथ ही पति के हाथ से पानी और खाने का पहला निवाला लेने की परंपरा भी है। खास बात ये है कि इस बार करवा चौथ का व्रत संकष्टी गणेश चतुर्थी के साथ पड़ रहा है जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। गुरुवार को भीड़-भाड़ कम थी लेकिन शुक्रवार को बाजार में इतनी महिलाओं की इतनी भीड़ दिखाई दी कि पांव रखने की तक जगह नहीं थी, साडिय़ां व कपड़े की दुकानें महिलाओं से खचा-खच्च भरी रही। इसी तरह सोने-चांदी के दुकानों पर जमकर खरीदी की गई। वहीं कुसुमबाई, सदर बाजार, बतासा बाजार, हनुमान बजरिया, गोल मार्केट में महिलाओं की खासी भीड़ देखी गई जिन्होंने करवाचौथ के लिए किसी तरह की कमी नहीं रह जाये इसलिए सोलह श्रृंगार की खरीददारी की गई। श्रंगार, चूड़ी, साड़ी, ज्वैल्र्स, मेहंदी आदि दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रही। शुक्रवार को देर शाम तक बाजार में भीड़ बनी रही और बाजार भी अच्छा-खासा चला।
    यहां पर हुई सबसे ज्यादा भीड़

           शहर के सदर बाजार, परेड चौराहा, सब्जी मण्डी रोड, कुसुमबाई मार्केट, बतासा बाजार, संतोषी माता मंदिर, गोल मार्केट आदि महिलाओं की सुबह से ही भीड़ दिखाई दे रही थी और शाम 4 बजे के बाद बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं बची, महिलाओं करवा से लेकर सजने-सबरने तक के सोलह श्रृंगार की खरीददारी की गई। अन्य दिनों की अपेक्षा शुक्रवार को सबसे ज्यादा बाजार खरीददारी महिलाओं ने की।
    कब खोलें व्रत
             चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।
    करवा चौथ की पूजा विधि
             इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया, काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं। सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में छलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं।
    धनतेरस की होने लगी खरीदारी
                    5 नवंबर को धनतेरस है और बाजार में खरीददारी अभी से शुरु हो गई लोग वर्तन व चांदी के सिक्के अभी से खरीदने लगे हैं जिससे इलेक्ट्रोनिक, पकड़ा, सोने-चांदी के व्यापारी उम्मीद लगा रहे हैं कि इस बाजार बाजार अच्छा चलेगा। शुक्रवार को भी महिलाओं ने सोलह श्रृंगार के साथ-साथ धनतेरस का सामान की भी खरीददारी की।
    दिवाली की खरीददारी शुरु
              ग्रामीण क्षेत्र के लोग अभी से इसलिए खरीददारी करने में जुट गये है कि दिनों-दिन बाजार में भीड़ बढ़ती जा रही है इसलिए भीड़ से बचने के लिए लोगों ने खरीददारी करना शुरु कर दिया है और बाजार में जहां सन्नाटा पड़ा हुआ था अब व्यापारियों के चेहरे खिल उठे हैं।
    इनका कहना है:
               मेरी शादी फरवरी माह में हुई थी मेरा पहला करवाचौथ व्रत है इसलिए मैंने बाजार में सोलह श्रृंगार की खरीददारी देर शाम तक की।
    -वर्षा गोयल, जामना रोड निवासी भिण्ड 
               मैं अपनी पत्नी के साथ पहली बार व्रत रखूंगा ताकि उसे भी किसी तरह की परेशान नहीं हो क्योंकि पति-पत्नी सुख-दुख के साथी होते हैं।
    -अरुण भदौरिया, दुर्गा नगर भिण्ड

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