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    महाकवि सूर्यमल्ल ने अल्पायु में ही रचा खंडकाव्य "रामरंजाट"..........

    बून्दी 20/10/2018 (Krishnakantrathore) @www.rubarunews.com>>- महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण की जयंती पर बून्दी और उनकी जन्मस्थली ग्राम हरणा में कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। जहाँ भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) की ओर से महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण की 202वीं जन्म जयंती पर शुक्रवार को मिश्रण चौराहे स्थित उनकी प्रतिमास्थल पर पुष्पमाला अर्पित की गई, तो ग्राम हरणा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् बून्दी, सूर्यमल्ल मिश्रण विकास समिति हिंडोली और उमंग संस्थान की और से महाकवि की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
                     बून्दी में आयोजित कार्यक्रम में इंटेक संयोजक विजयराज सिंह व राजकुमार दाधीच ने अपने संबोधन में महाकवि की विद्वता और प्रतिभा का बखान करते हुए कहा कि महाकवि सूर्यमल्ल ने मात्र 10 वर्ष की अल्पायु में ही अपने खंडकाव्य रामरंजाट की रचना कर दी थी। सूर्यमल्ल मिश्रण ने अपने ग्रंथ वंशभास्कर, वीर सतसई सहित समस्त रचनाओं में अपनी विद्वता की स्पष्ट छाप छोड़ी है। 
                     इन्होंने कहा कि सूर्यमल्ल चारणों की मिश्रण शाखा से संबद्ध कवि थे। जिनकी कीर्ति का आधार 'वंशभास्कर’  ग्रंथ था, जिसे कुछ इतिहासकार इसे ऐतिहासिक दृष्टि से पृथ्वीराज रासो से भी अधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं। साहित्यिक दृष्टि से इस ग्रंथ की गणना 19वीं सदी के महाभारत के रूप की जाती है। अधूरा होते हुए भी यह अत्यंत विस्तृत ग्रंथ लगभग तीन हजार पृष्ठों का है। संभवतया इससे बड़ा ग्रंथ हिंदी में दूसरा कोई नहीं है। इस कृति में मुख्यत: बूंदी राज्य का इतिहास वर्णित है। 
    महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण और बून्दी राज्य.......... 
                 कवि सूर्यमल्ल मिश्रण का जन्म बूंदी जिले के हरणा गांव में कार्तिक कृष्णा प्रथम वि. सं. 1872 को हुआ था। उनके पिता का नाम चंडीदान तथा माता का नाम भवानीबाई था। उनके पिता अपने समय के प्रकांड विद्वान-प्रतिभावान कवि थे। बूंदी के तत्कालीन महाराज विष्णुसिंह ने इनके पिता चंडीदान को एक गांव, लाखपसाव और कविराजा की उपाधि दी थी। बूंदी के राजा रामसिंह उनका बड़ा सम्मान करते थे। चंडीदान ने बलविग्रह, सार सागर एवं वंशाभरण नामक अत्यंत महत्व के तीन ग्रंथों की रचना की। 
    कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने अपनी 10 वर्ष की आयु में ही खंड काव्य रामरंजाट की रचना कर सभी को चोंका दिया था। इन्होंने वंशभास्कर, वीर सतसई, धातु रूपावली, बलवद विलास, छंदोभमूल, सतिरासो की रचनाएं की। इन्हें बून्दी के पांच रत्नों में गिना जाता था।
                     स्वतंत्रता संग्राम के समय तीव्रता और वीरता पोषित करने इस कवि की रचनाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन्होंने अपनी कृतियों और पत्रों के द्वारा गुलामी करने वाले राजपूत शासकों को धिक्कारा। कवि सूर्यमल्ल के विचारों एवं रचनाओं को राजस्थान में राष्ट्रीयता की संवृद्धि का सर्वप्रथम प्रेरक माना जाता हैं। वीरता के पोषक इस कवि को वीर रसावतार की संज्ञा भी दी गई हैं।
    समारोह में ये रहे शामिल..........
                     समारोह में नंदप्रकाश शर्मा, जक्कीउरुद्दीन, बोहरा, ऋतुराज दाधीच, राजेंद्र भारद्वाज, पुरुषोत्तमलाल पारीक, दिनेश शर्मा, दुर्गाप्रसाद माथुर, सुरेशकुमार जैन, दुर्गालाल, नारायणलाल, आनंदराजसिंह, शिवराजसिंह, अमरसिंह राणावत, रामराजसिंह सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे। 
    जन्मस्थली ग्राम हरणा में भी की गई पुष्पांजली.........
                      महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण की जन्मस्थली ग्राम हरणा में भी कई संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने पहुँच कर मिश्रण की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।  ग्राम हरणा में ही अखिल भारतीय साहित्य परिषद् बून्दी के अध्यक्ष गणेश लाल गौतम, सचिव जमनाशंकर राठी और सुरेंद्र सोलंकी तथा उमंग संस्थान के सविता लौरी, कृष्ण कान्त राठौर, महेश श्रृंगी, ज्योत्स्ना खत्री, नन्द किशोर सैनी तथा जीतेन्द्र वर्मा ने भी महाकवि की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
                    यहां पर सूर्यमल्ल मिश्रण विकास समिति हिंडोली के पदाधिकारियों ने महाकवि की प्रतिमा को स्नान करवा कर साफ़ सफाई की और दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया और पुष्पांजलि दी। इन्होंने यहाँ पर श्रमदान भी किया और विचार गौष्ठी आयोजित की, जिसमें निर्देशक धर्मेन्द्र सुवालका, अध्यक्ष अशोक जोशी , कोषाध्यक्ष मुकेश राठौर, सहलाकर मनीष अग्रवाल, सदस्य प्रमोद अवस्थी ,पप्पू लाल मीणासहित सदस्य मौजूद रहे।
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