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    स्वास, सफल एवं स्टार नाम से कम प्रदूषण वाली आतिशबाजी का विकास


    नईदिल्ली 02/नवम्बर/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>  केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भू-विज्ञान, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने आज यहां एक प्रेस वार्ता में कहा, “वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों को विकसित किया है जो न सिर्फ पर्यावरण-हितैषी हैं किंतु परम्परागत पटाखों की तुलना में 15-20% सस्ते भी हैं। 
                   इन पटाखों का नाम सेफ वॉटर रिलीज़र (स्वास), सेफ मिनिमल एल्युमिनियम (सफल) एवं सेफ थर्माइट क्रैकर (स्टार) रखा गया है।
                   यह प्रमुखता से बताते हुए कि भारतीय आतिशबाजी उद्योग 6000 करोड़ के वार्षिक टर्नओवर से भी अधिक का है एवं 5 लाख से भी अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोज़गार के अवसर प्रदान करता है, मंत्री महोदय ने कहा कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के इस प्रयास का उद्देश्य जहां प्रदूषण को कम करना है वहीं इस उद्योग में शामिल लोगों की आजीविका की रक्षा करना भी है। मंत्री महोदय ने बताया कि आतिशबाजी निर्माताओं ने पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रयोगशालाओं में काफी रुचि दर्शायी एवं नये पटाखे बनाने के लिये उनकी निर्माण इकाईयों में किसी परिवर्तन की आवश्यकता भी नहीं होगी।  
                डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने भी पटाखों में और अधिक सुधार के लिये अनेक कदमों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार सीएसआईआर-नीरी में एक उत्सर्जन परीक्षण सुविधा की स्थापना की गई है एवं परम्परागत एवं प्रदूषणहीन पटाखों के उत्सर्जन एवं ध्वनि की निगरानी के लिये एक विस्तृत परीक्षण जारी है।यह सुविधा आतिशबाजी का उपयोग करते समय नमूनों एवं नापतौल के लिये समस्त उच्च स्तरीय यंत्रों का इस्तेमाल करती है।
                 मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि कच्चे माल के निरूपण के लिये एक सुविधा भी अस्तित्व में आने वाली है क्योंकि यह पाया गया है कि कई बार आतिशबाजी में ख़राब कच्चे माल का इस्तेमाल हवा में प्रदूषण के कणों का श्रोत बनता है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद शिवकाशी में कच्चे माल के परीक्षण की अतिरिक्त सुविधाएं स्थापित कर इस संबंध में और मज़बूती लाएगा। कुछ औपचारिकताओं के पूरा होने पर परीक्षण की यह प्रक्रिया अगले दो माह में प्रारंभ हो जाने की संभावना है। यह सुविधा पटाखा निर्माण संघ की परीक्षण सुविधाओं के साथ सहयोग एवं साझेदारी कर आ सकती हैं।
                  आतिशबाजी क्षेत्र पर विस्तृत रुख लेते हुए डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने कहा कि अपने सामाजिक-विज्ञानसम्मत उत्तरदायित्व के अनुरूप वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) दीर्घावधि एवं भविष्यगत लक्ष्यों पर कार्य कर रहा है जिनसे स्वच्छ एवं सुरक्षित दीपावली मनाई जा सकेगी।


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