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    अस्तांचल सूर्य अर्घ्य के साथ शुरू हुआ महापर्व छठपूजा.-नदी,तालाब के घाटों पर उमड़ी भीड


    पालघर(महाराष्ट्र). 13/11/2018 (OmPrakashDwivedi) @www.rubarunews.com>> लोक आस्था के महापर्व छठपूजा के ब्रतियों ने आज सायं कुछ चौबीस घंटों के निर्जला उपवास के पश्चात जिले में स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा तैयार घाटों पर अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देकर तकरीबन 36 घंटों के कठोर निर्जला उपवास पर्व का आगाज शुरू हुआ.।अगले दिन सुबह उषाकाल में सूर्योदय के सूर्य उपासना के साथ गाय के दूध से विधिवत मंत्रोच्चार के बीच सूर्यषष्ठी का ब्रत छठपूजा संपन्न हो जायेगा.।
           
    पालघर जिले में सजग प्रशासन के साथ जिले के स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से तमाम नदी, तलाबों के घाटों पर साफ सफाई एवं विद्युतीय व्यवस्था के बीच साफ पानी एवं जलपान की भी व्यवस्था रखी गयी है.।
          पालघर जिला मुख्यालय स्थित टेभोंडे रोड पर गणेशकुंड सहित औद्योगिक शहर बोईसर पूर्व बेटेगाँव, पंपापुर(यादवनगर), धनानी नगर दुर्गा मंदिर छठघाट एवं बोईसर पश्चिम में वाणगंगा घाट पर विहिप बजरंग दल के साथ सहयोगी संगठनों ने छठब्रतीयों समेत उनके साथ पहुंचने वाले लोगों के सेवा हेतु व्यापक स्तर सुविधाओं का व्यवस्था बनाये रखा.। जलपान, चाय ,शुद्ध जल, के साथ लोगों को घाटों पर भारी भीड़ के मद्देनजर सुविधा से पानी में उतरने की ठीक तरह से व्यवस्था करते दिखे.। बजरंग दल के जिला संयोजक चंदन सिंह बेटेगाँव, मनीष कुमार सिंह धनानी नगर, वाणगंगा में पवन कुमार सिंह के साथ तमाम सहयोगी जन एवं स्थानीय पुलिस महकमें के लोग शतत प्रयत्नशील नजर आये.।
           
    ज्ञात रहे भारत में सूर्योपासना के प्रसिद्ध पर्व छठपूजा मूलतः सूर्यषष्ठी ब्रत को होने के कारण छठब्रत के रुप में मनाया जाता है.।परिवारिक सुख
    -समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर मनाया जाता है.।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी माना गया है कि षष्ठी तिथि (छठ) को एक विशेष खगोलीय परिवर्तन होता है.। इस समय सूर्यदेव की पैराबैगनी किरणें
    (Ultra violet Rays) पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती है.। इस  कारण इसके संभावित कुप्रभावों से मनुष्य यथा संभव रक्षा करने का सार्मथ्य मिलता है.। छठ म़े कोई मूर्ति पूजा नही है.। सूर्य की शक्तियों का मुख्य स्रोत उनकी अर्धांगिनी उषा और प्रत्युषा है.। छठ पर्व पर सूर्य के साथ साथ दोनों शक्तियों कु संयुक्त अराधना की जाती है.। सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण  (प्रत्युषा) और पहली किरण (उषा) को अर्घ्य देकर श्रद्धा एवं पूरे विश्वास के साथ छठब्रती लोग नमन करते है.।


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