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    संविधान सभा के सम्मान हेतु मनाया जाता है विधि दिवस-श्री द्विवेदी



    दतिया (RamjisharanRai ) @www.rubarunews.com>> मान0 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली/म0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती सुनीता यादव के मार्गदर्शन में अपर जिला न्यायाधीश/सचिव श्री संजय कुमार द्विवेदी की उपस्थिति में दिनांक 26 नवम्बर 2018 को उपजेल सेवढ़ा जिला दतिया में राष्ट्रीय विधि दिवस के कार्यक्रम मनाया गया। उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजय कुमार द्विवेदी द्वारा राष्ट्रीय विधि दिवस का महत्व बताते हुय कहा गया कि विधिक बंधुत्व को बढ़ावा देने या इस तरह की विचारधारा के प्रसार के लिए यह दिवस प्रति वर्ष 26 नवम्बर को आयोजित किया जाता है। वर्तमान में भारतीय न्यायपालिका संवैधानिक लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। इसी दिन वर्ष 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था।
        श्री संजय कुमार द्विवेदी द्वारा बताया गया कि 26 नवम्बर 1949 के पश्चात करीब 30 वर्षों बाद भारत के उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएशन ने 26 नवम्बर की तिथि को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में घोषित किया था। तब से प्रति वर्ष यह दिवस पूरे भारत में राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। विशेषकर विधिक बंधुत्व को बढ़ावा देने या इस तरह की विचारधारा को फैलाने के लिए इस दिवस का महत्व है। वस्तुतः यह दिवस संविधान को निर्मित करने वाली संविधान सभा के उन 207 सदस्यों के अतुलनीय योगदान को देखते हुए और उन्हें सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है।
        वर्ष 2013 में भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएसन ने दो दिवसीय आईएनबीए 26 और 27 नवम्बर को भारतीय अंतरराष्ट्रीय केन्द्र ने एक अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की थी और इन दो दिवसों को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में आयोजित किया था इस सम्मेलन में सम्माननीय न्यायाधीश वर्ग, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी फाच्र्यून 500 कंपनियों के वकीलों ने भी भाग लिया था। इसके अलावा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की विधिक संपतियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया था। इस सम्मेलन का मूल उद्ेदश्य औद्योगीकरण से जुड़े विधिक वर्गों को एक आधार प्रदान करना था। इसके अलावा इस सम्मेलन में बहुत सारे राष्ट्रीय और अंतराष्टीय मुद्दों से जुडे़ विधिक पहलुओं पर भी चर्चा की गयी थी।
         भारत के उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएसन के राष्टीय अध्यक्ष के अनुसार भारत का उच्चतम न्यायालय मानवाधिकारों और शांति को बनाये रखने में संविधान का रक्षक है। यह सर्वदा समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों में अपनी सहभागिता अदा करता है। साथ ही समाज के मूल कर्तव्यों को भी आगे बढ़ाने में सहभागी होता है, और इसके उद्देश्यों को गति प्रदान करता है। यह विधि के नियमों को स्थापित करने के साथ-साथ लोकतंत्र का रक्षक भी होता है और मानवाधिकारों की रक्षा भी करता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इस संदर्भ में बहुत सारी जानकारियां दी गयी है। साथ ही विधि के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को भी परिभाषित किया गया है।
          विशिष्ट अथिति के रूप में न्यायिक मजिस्टेट प्रथम श्रेणी सेवढ़ा श्री राजेश जैन उपस्थित रहे जिन्होंने जेल में उपस्थित कैदियों को प्ली बारगेनिंग प्रक्रिया एवं बंदियों को उनके अधिकारों के बारे में बताया। श्री जैन ने कहा कि कोई भी व्यक्ति महिला या पुरूष जन्म से अपराधी नहीं होता और न ही स्वेच्छा से कारागार में प्रवेश लेता है। समाज में गरीबी, अज्ञानता, भय, क्रोध व दुर्घटनात्मक परिस्थितियों के कारण व्यक्ति से अपराध घटित हो जाते है। प्रकरण के विचारण के लिए या सजा के कारण व्यक्तियों को कारागर में रहना पड़ता है, जिससे उनकी स्वच्छन्दता प्रतिबिंबित हो जाती है किंतु अन्य सभी मूल अधिकार, मानव अधिकार सामान्य तौर पर उस मूल कर्तव्य या दायित्व के साथ उपलबध रहते हैं।
          कार्यक्रम में उपस्थित जिला विधिक सहायता अधिकारी सुश्री अंकिता शांडिल्य द्वारा आगमी लोक अदालत एवं मध्यस्थता के माध्यम से विवादों को निपटाने की सरल एवं त्वरित सुलभ, सस्ती एवं निष्पक्ष प्रक्रिया के बारे में बताया गया। उक्त कार्यक्रम के साथ मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत सुश्री शांडिल्य ने मध्यस्थता के बारे में विस्तृत रूप से बताया कि-
    मध्यस्थता में क्या आता है?
     मध्यस्थता अधिकारी निष्पक्ष मध्यस्थता के लिए पूर्णता प्रशिक्षित होता है।
     सभी पक्षों को उनके विवादों का हल निकालने में मदद करता हैं। मध्यस्थता ढांचागत प्रक्रिया है । इसकी कार्यप्रणाली निम्न है-
    1. परिचय- मध्यस्थता अधिकारी मध्यस्थता की प्रक्रिया से सभी पक्षों को अवगत करवाता है। उन्हें प्रक्रिया के नियमों एवं गोपनियता के बारे में बतलाता हैं।
    2. संयुक्त सत्र- मध्यस्थता अधिकारी, पक्षों से उनके विवादों के प्रति जानकारी प्राप्त करता है तथा विवाद के निपटारे के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है।
    3. पृथक सत्र- संयुक्त सत्र के अलावा यदि जरूरत होतो मध्यस्थ अधिकारी हर पक्ष से अलग-अलग बात करते है। इस सत्र में सभी पक्ष अपने हर मुद्दे को मध्यस्थ अधिकारी के समक्ष रख सकते है। जिसे गोपनीय रखा जाता है। इस सत्र में मध्यस्थता अधिकारी विवाद की जड़ तक पहुंचता है।
    4. समझौता- विवाद के निवारण उपरांत मध्स्यथ अधिकारी सभी पक्षों से समझौते की पुष्टि करवाता है तथा उसकी शर्ते स्पष्ट करवाता है। इस समझौते को लिखित रूप में अंकित किया जाता है। जिस पर सभी पक्ष हस्ताक्षर करते हैं।
       दिनांक 08 दिसम्बर 2018 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की भी जानकारी प्रदान की गयाी। जिसमें बताया गया की लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों का शीघ्र व सस्ता न्याय प्रदान किया जाता हैं।
       श्री संजय कुमार द्विवेदी अपर जिला न्यायधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दतिया द्वारा उपजेल सेवढ़ा का जेल निरीक्षण कर वहां उपस्थित बंदियों को उचित खान-पान, चिकित्सीय व्यवस्था तथा विधिक सहायता आदि का निरीक्षण कर जेल में उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
            श्री द्विवेदी द्वारा आगामी दिनांक 08.12.2018 को आयोजित होने वाली वाली आगमी लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ता के साथ बैठक कर तैयारी का जायजा लिया एवं लोक अदालत मे अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण हेतु
           उक्त कार्यक्रम के दौरान ही न्यायाधीशों द्वारा उपजेल सेवढ़ा का जेल निरीक्षण भी किया गया। कार्यक्रम में उपजेल अधीक्षक श्री शिवपालजी उपजेल सेवढ़ा एवं श्री आर0एस0 निरंजन, अध्यक्ष अभिभाषक संघ सेवढ़ा भी उपस्थित रहे।

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