• --New-- Click here to Watch News channel online.
  • कृष्ण जन्म पर झूमे श्रृद्धालु, गाजे बाजों के साथ हुआ कृष्ण अवतार | Rubaru news
    Powered by Blogger.

    कृष्ण जन्म पर झूमे श्रृद्धालु, गाजे बाजों के साथ हुआ कृष्ण अवतार



    भिण्ड (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> शहर के अटेर रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा वाचक आर्चाय ब्रजेश शास्त्री ने कृष्ण जन्मलीला का वर्णन किया और अपने प्रवचनों में कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार व पाप अधिक बढ़ चुका था तब पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपने उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई और पृथ्वी पर बढ़ रहे पाप व अत्याचार की व्यथा सुनाई तो सभी देवता हो उठे और पृथ्वी को भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। यहां पृथ्वी बोली ने अपनी पीड़ा बताई तो भगवान विष्णु ने अवतार लेकर पृथ्वी पर आने की बात की और कहा मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव नाम से प्रसिद्ध होंगे। मैं उनकी पत्नी देवकी के गर्भ से कृष्ण के रूप में जन्म लूँगा और उनकी दूसरी पत्नी के गर्भ से मेरी सवारी शेषनाग बलराम के रूप में उत्पन्न होंगे।
    कुरुक्षेत्र के मैदान में मैं पापी क्षत्रियों का संहार कर पृथ्वी को पापों से भारमुक्त करूंगा। देवकी का भाई कंस अपनी बहन को विदा करने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई जिस बहन को विदा करने कर रहा है उसका आँठवा पुत्र तेरा संहारक होगा। इससे कंस क्रोधित हो उठा और उसने सोचा कि देवकी की आठवी संतान को जन्म लेने ही नहीं दूंगा। इस पर वसुदेव ने कहां कि हम आठवी संतान तुम्हें सौंप देंगे। इस पर कंस ने देवकी और वसुदेव को सख्त पहरा लगाकर कारागार में बन्द कर दिया। बाद में नारदज पहुँचे और कंस से बोले कि तुम आठवी संतान की गिनती कैसे करोगे तो कंस ने सभी संतानों का वध करने का निर्णय लिया और एक एक कर सभी संतानों का वध करता रहा। अंत में भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और कृष्ण जन्म लीला के तहत वासुदेव देवकी के सामने चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा, अब मै बालक का रूप धारण करता हूँ तुम मुझे तत्काल गोकुल में नन्द के घर पहुँचा दो और उनके यहां जन्मी कन्या को कंस को सौंप दो। इसके बाद वसुदेव की हथकडियाँ खुल गई। दरवाजे पहरेदार सो गये वासुदेव कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल को चल दिए रास्ते में यमुना श्रीकृष्ण के चरणो को स्पर्श करने के लिए बढने लगी भगवान ने अपने पैर लटका दिए चरण छूने के बाद यमुना घट गई वासुदेव यमुना पार कर गोकुल में नन्द के यहाँ गये बालक कृष्ण को यशोदाजी की बगल मे सुंलाकर कन्या को लेकर वापस कंस के कारागार में आ गए। खबर लगते ही कंस आया और कन्या को देवकी का आंठवा पुत्र समझकर उसका वध करने लगा वैसे ही कन्या कंस के हाथो से छूटकर आकाश में उड गई और देवी का रूप धारण का बोली कंस तुझे मारने वाले गोकुल में पहुच चुका है। कंस ने कृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजे श्रीकृष्ण ने अपनी आलौलिक माया से सारे दैत्यो को मार डाला। बडे होने पर कंस को मारकर उग्रसेन को राजगद्दी पर बैठाया। इससे पूर्व कथा वाचक आर्चाय ने राजाबली की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बली पराक्रमी और दानी थे साथ ही भगवान के भी बड़े भक्त थे, लेकिन घमंडी था। भगवान के मन में राजा बली की परीक्षा लेने वामन अवतार लेकर उसके यज्ञ में पहुँच गए। जैसे ही वे राजा बली के यज्ञ स्थल पर तो भगवान के आकर्षक रूप देखकर उन्हें उचित स्थान दिया। अंत में जब दान की बारी आई, तो राजा बली ने भगवान के वामन अवतार से दान माँगने के लिए कहा, तब उन्होंने राजा बली से राज्य में तीन पग जमीन माँग ली। तब राजा बली मुस्कुराए और बोले तीन पग जमीन तो बहुत छोटा दान है कोई बड़ा दान माँग लीजिए, लेकिप वामन अवतार ने उनसे तीन पग जमीन ही माँगी। तब राजा बली ने संकल्प के साथ उन्हें तीन पग जमीन दान में देने की घोषणा की। इसके बाद भगवान दो पग में पूरे राज्य को नाप दिया, लेकिन तीसरे पग के लिए राजा बली के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था। महादानी होने का परिचय देते हुए तीसरे पग के सामने अपने आपको समर्पित कर दिया और भगवान ने अपना रूप दिखकर कोई वरदान मांगने के लिए कहा। उनकी पत्नी विन्ध्याबली ने कहा कि आप हमारे द्वार पर भिक्षुक बनकर आए हो, हम आपसे कैसे कुछ मांग सकते हैं।

    Share on Google Plus

    About Rubaru News

    This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.
      Blogger Comment
      Facebook Comment

    0 comments:

    Post a Comment