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    सफलता की कहानी आत्मनिर्भरता के नए सोपान गढ़ रही हैं आदिवासी महिला सुनीता


    श्योपुर, 31/दिसंबर/2018 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> दिव्यांग पति और परिवार की आजीविका चलाने न केवल वाहन की स्टेंरिंग थामी बल्कि अब सड़कों पर संचालित की जा रही मेजिक वाहन में सवारी और सामान ढोकर जिले आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम डूंडीखेड़ा निवासी आदिवासी महिला चालक श्रीमती सुनीता भिलवार आत्मनिर्भरता के नए सोपान गढ़ने में सहायक बन रही है। 
               जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम डूंडीखेड़ा निवासी आदिवासी महिला श्रीमती सुनीता भिलवार के पति श्री बंशी आदिवासी दिव्यांग होने के कारण परिवार की गाड़ी चलाने में असहाय महसूस कर रही थी। साथ ही अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। इसी बीच एनआरएलएम के जिला परियोजना समन्वयक श्री सोहनकृष्ण मुदगल ग्राम डूंडीखेड़ा में महिलाओं को आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने की जानकारी चैपाल पर दे रहे थे। 
                 आदिवासी समुदाय के व्यक्तियोें का जीवन स्तर सुधारने की दिशा में जिला प्रशासन एवं एनआरएलएम के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा दी जा रही गांव की चैपाल पर जानकारी का अनुसरण करते हुए आदिवासी महिला श्रीमती सुनीता भिलवार ने मेजिक वाहन लेकर आजीविका की दिशा में स्वयं वाहन चलाने का मन बनाया।  28 वर्षीय सुनीता आठवी उत्र्तीण होकर अपने परिवार की गुजर बसर करने में सहायक बन रही है। साथ ही अपने तीन बच्चों की पढ़ाई लिखाई आसानी से कर रही है।  
                     श्रीमती सुनीता भिलवार वर्तमान में मेजिक वाहन स्वयं चलाकर सवारी और सामान के माध्यम से अपने क्षेत्र की सड़कों पर आसानी से आजीविका चलाने में सक्षम बन रही है। उनके द्वारा  ग्राम डंूंडीखेडा में सीआरपी ड्राइव की महिलाओ के साथ समूह में काम करना भी शुरू किया है। साथ ही समूह की महिलाओं के साथ घर’-घर जाकर संपर्क करने में उनका हाथ बटा रही है। इसी प्रकार अपनी मेजिक वाहन का नाम आजीविका एक्सप्रेस रखते हुए अपनी आमदनी में दिनोंदिन तरक्की कर रही है। वाहन संचालन से प्रतिदिन 2000 रूपए की आमदनी प्राप्त हो रही है। इस आमदनी से लिए गए 5 लाख रूपए के ऋण की किश्त 10 हजार प्रतिमाह चुका रही हूं।  
                 जिले के आदिवास विकासखण्ड कराहल की ग्राम पंचायत गढ़ला के ग्राम डूंडीखेड़ा निवासी महिला आदिवासी श्रीमती सुनीता भिलवार ने बताया कि आजीविका मेजिक वाहन को स्वयं चलाकर कभी-कभी जिले से बाहर सफर किया जाता है। इस कार्य में दिव्यांग पति श्री बंशी आदिवासी का भी सहयोग ले रही हूं। यह सब करिश्मा जिला प्रशासन और एनआरएलएम के सहयोग से प्राप्त हुआ है।  


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