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    ‘रनवे टू ए बिलियन अपॉर्च्युनिटीज़’- रक्षा मंत्री ने एयरोइण्डिया 2019 का शुभारंभ किया


    नईदिल्ली  (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अंतर्राष्ट्रीय एयरोस्पेस एवं रक्षा प्रदर्शनी के 12 वें द्विवार्षिक संस्करण का शुभारंभ किया एवं बंगलुरू के येलाहंका एयरफोर्स स्टेशन पर बड़ीधूमधाम से एयरो इण्डिया 2019 की शुरुआत की घोषणा कर दी । एयरो इण्डिया के इस संस्करण में रक्षा एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय दोनों की साझा भागीदारी सेरक्षा एवं नागर विमानन दोनों क्षेत्र पहली बार एक समग्र आयोजन मेंसंयुक्त हुए हैं । एशिया के सबसे बड़े एयर शो में 600 भारतीय कंपनियां एवं 200 विदेशी कंपनियांभागीदारी कर रही हैं तथा इस आयोजन की साक्षी बन रही हैं ।
                      आयोजन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री एच डी कुमारस्वामी, नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री श्री सुरेश प्रभु, रक्षा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री सदानंद गौड़ा, सेना के तीनों अंगों- थल सेना, वायुसेना व नौसेना के प्रमुख,रक्षा सचिव श्री संजय मित्रा, रक्षा उत्पादन सचिव डॉक्टर अजय कुमार, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष एवं सचिव डॉक्टर सतीश रेड्डी, विदेशों से विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, सेना के तीनों अंगों के सेवारत अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं रक्षा उद्योगों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे ।
                            अपने उद्घाटन उद्बोधन के अवसर पर श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विश्व भर सेअलग-अलगदेशों की नुमाइंदगी कर रहे प्रतिनिधिमंडलों के साथ अनेक विदेश मंत्रियों एवं उप मंत्रियों का स्वागत किया । उन्होंने कहा कि एयरो इण्डिया केइस संस्करण में भारत को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने का एवं लाक्षणिक रूप सेरनवे टू ए बिलियन अपोर्च्युनिटीबनाने का मनोरथ एवं प्रयास है !
                          उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत ने स्वयं को विभिन्न विश्व स्तरीय वैमानिकी उपकरणों के उत्पादन एवं निर्यात के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया है एवं साथ में कहा कि देश अब देश के पासनोज़ टू टेल प्रोडक्शन/ किसी उपकरण को शुरुआत सेअंत तक संपूर्ण रूप से बनानेकी योग्यता है । उन्होंनेरक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता में वृद्धि करने हेतु गति प्रदान करने वाली सरकार कीमेक-इन-इण्डियापहल की प्रशंसा की एवं ऐसे प्रावधान बनाने पर बल दिया जिनसेएक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला तंत्रकी रचना करने के लिये डिज़ाइन एवं उत्पादन सुविधाओं का उपयोग तथा संस्थापन करने वाले पारितंत्र की रचना हो पाए ।
                        रक्षा अधिग्रहणों के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान सशस्त्र बलों के लिये रक्षा उपकरणों के अधिग्रहण हेतु भारतीय व्यापारियों के साथ 1,27,500 करोड़ रुपये के 150 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किये गए हैं । उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने बाइ एंड मेकश्रेणियोंके अंतर्गत केवल भारतीय व्यापारियों को 2,79,950 करोड़ रुपये के 164 प्रस्तावों के लिये एओएन की सहमति प्रदान की है । उन्होंने यह भी बताया कि आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) एवं रक्षा क्षेत्र में कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के लिये वीओपी में 2013-14 में 43,746 करोड़ रुपये से 2017-18 में 58,163 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई, जिसमें से 40% उत्पादन का कार्य निजी क्षेत्र को सौंप दिया गया है एवं सरकार ने निजी क्षेत्र मेंसात निर्धारित प्रकार केगोलाबारूद के उत्पादन के लिये आरएफपी भी जारी किया है ।
    रक्षा मंत्री ने अपने उद्बोधन के दौरान मेक इन इण्डियाके अंतर्गत सरकार की अनेक नीतिगत शुरुआतों की प्रशंसा की जैसे रक्षा उत्पादन में 100% एफडीआई, डिफेंस ऑफसेट पॉलिसी 2016, रक्षा क्षेत्र के आइटमों के लिये लाइसेंस का निरसन, आई-डेक्स एवं डिफेंस इन्वेस्टर सेल । उन्होंने भारतीय पैवेलियन की हालिया सफलताओं के रूप में एस 92 हेलिकॉप्टर केबिन, एडवांस एयरक्राफ्ट कॉकपिट, डॉर्नियर के लिये ग्लास कॉकपिट एवं बोइंग हेतु सीएच-47 पाइलॉन का उद्वरण दिया । उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय उपक्रमों की एलसीए, एलसीएच, एएलएच, सी 295 इत्यादि समेत 4000 विमान बनाने के लिये प्रशंसा भी की ।
    उन्होंने 10,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की प्रशंसा की जिन्होंने जटिल हथियार प्रणालियों एवं विमानों के 80% पुर्ज़े, समुच्चय एवं संयोजन बनाए हैं । उन्होंने यह जानकारी भी दी कि 424 कंपनियों ने रक्षा उत्पादन के लिये लाइसेंस प्राप्त कर लिया है जो कि पिछले चार वर्षों के दौरान प्राप्त किये गए लाइसेंस की संख्या का लगभग दोगुना है । रक्षा मंत्री नेव्यापार करने की सुगमतामें वृद्धि के लिये जनवरी 2018 में स्थापित रक्षा निवेशक सेलके बारे में बताया एवं यह जानकारी दी कि अब तक 350 उद्योगों को सहायता प्रदान की गई है । उन्होंने आयुध कारखानोंमें बनने वाले 275 आइटमों की अधिसूचना रद्द किये जाने काज़िक्र भी किया एवं बताया कि निजी उद्योगों के लिये रक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) एवं आयुध कारखानों की सुविधाएं खोलीजा चुकी हैं ।
    उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना एवं वायुसेना से संबंधित 34 परियोजनाओं को पहले ही मेक-II’ श्रेणी के अंतर्गत सैद्धांतिक अनुमतिप्रदान की जा चुकी है । रक्षा मंत्री ने बताया कि एफडीआई नीति का नवीनीकरण कर दिया गया था एवं अब ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से 49% तक तथा 49% तक सरकारी रास्ते से विदेशी निवेश को अनुमति प्रदान कर दी गईहै । उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार वर्षों में रक्षा एवं वैमानिकी के क्षेत्रों में छह कंपनियों ने 237 करोड़ रुपये की सरकारी अनुमति प्राप्त की जबकि ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से 200 करोड़ रुपये प्राप्त किये गए । 
    रक्षा मंत्री नेश्रोताओं को देश भर में रक्षा नवाचार केंद्रों के नेटवर्क की रचना करने एवं रक्षा तथा वैमानिकी से संबंधित विषयों के समाधान के लिये दिनांक12 अप्रेल 2018 को प्रारंभ की गईआई-डैक्स योजना के बारे में जानकारी दी । उन्होंने कोयम्बटूर में पहले ही शुरू किये जा चुके प्रथम नवाचार केंद्र तथा उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु में दो रक्षा गलियारों की स्थापना के बारे में जानकारी प्रदान की, जिनमें से सबसे नवीन20 जनवरी 2019 को तिरुचिरापल्ली में शुरू किया गया है जिसके लिये रक्षा उद्योग द्वारा 3200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता की गई है । उन्होंनेअधिक क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने के लियेएवं रक्षा एवं वैमानिकी के क्षेत्रों में पेटेंट संबंधी प्रविष्टियों को प्रोत्साहन देने के लिये रक्षा मंत्रालय द्वाराप्रारंभ मिशन रक्षा ज्ञान शक्तिके बारे में भी बताया ।
    श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि सरकार रक्षा उत्पादन के घरेलू पारितंत्र की रचना करने के लिये सक्षम वातावरण बनाने के प्रति प्रतिबद्ध थी, जिसके परिणाम पहले ही दृष्टिगोचर हो चुके हैं । उन्होंने कहा, “नीतिगत शुरुआतों एवं प्रक्रियागत सुधारों से मुझे विश्वास है कि भारत वैश्विक रक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख देश के रूप में उभरेगा । हम ऐसे पारितंत्र का निर्माण करेंगे जिसमें विदेशी रक्षा मौलिक उपकरण निर्माताओं (ओइएम) के साथ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों कीपरिष्कृत तकनीकी सहकार्यताहोगी । कौशल, प्रणालियों, तकनीकों एवं उत्पादन क्षमताओं के अधिक समेकन के साथ रणनीतिक साझेदारियां की जाएंगी ।”                    
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री एचडी कुमारस्वामी ने मंत्रियों एवं अन्य प्रतिनिधियों का स्वागत किया । इस अवसर परनागरिक उड्डयन मंत्री श्री सुरेश प्रभु एवं रक्षा राज्यमंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे ने भी अपनी बात रखी । 
    उद्घाटन भाषण के बाद तीन एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टरों ने भारतीय ध्वज तिरंगा, वायुसेना का ध्वज तथा एयरो इण्डियाका झंडा लेकर मंच के सामने से गुज़रते हुएविक्ट्रीफॉरमेशन बनाया । हवाई प्रदर्शनों की शुरुआत मंच के समक्ष अकेले विंटेज डाकोटा की उड़ान के साथ हुई । इसके बाद एलयूएच, एएलएच एमके-III एवं IV व एलसीएचसमेत अनेक स्वदेश निर्मित हेलिकॉप्टरों की उड़ान ने आकाश को अपने जेट-वॉश से भर दिया । तत्पश्चात तीन एएलएच एमके IV (रुद्र) हेलिकॉप्टरों ने विक्ट्रीफॉर्मेशन में उड़ान भरी । हॉक-आई एवं एचटीटी-40 के बगल मेंस्वदेशी डॉर्नियर 228 के फ्लाईपास्ट के बादकल सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम की अभ्यास उड़ान के दौरान हवा में हुई एक घातक टक्कर में अपनी जान गंवाने वाले विंग कमांडर साहिल गांधी को श्रद्धांजलि स्वरूपतेजस तथा जैग्वार के साथ मिसिंग मैन फॉर्मेशन मेंसुखोई विमानने उड़ान भरी । इसके बाद आसमान मेंमुख्य मंच के ऊपर अनेक प्रकार की एयरोबैटिक कलाबाज़ियों का प्रदर्शन करते हुए लड़ाकू विमान - सुखोई-30 एमकेआई, तत्पश्चात स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस, अमेरिकी एफ-16 फॉल्कन एवं फ्रांसीसी राफेल विमान- आए । एलयूएच, एलसीएच, एएलएच एमके-IV एवं सारंग हेलिकॉप्टर की टीम समेत अनेक हेलिकॉप्टरों ने अपने हवाई प्रदर्शन से दर्शकों को अचम्भित कर दिया । फाइनल एयरबस 330 नियो के हवाई करतबों के साथ शुरू हुआ जिसके बाद 1950 के विंटेज विमान बी-52 बम्बर्सने मनमोहक उड़ान भरी ।
       आयोजन में कुल मिलाकर 61 एयरक्राफ्ट भाग ले रहे हैं जिनमें से 31 उड़ान भर रहे हैं । इस वर्ष प्रदर्शन का कुल क्षेत्रफल 27,678 वर्ग मीटर से बढ़ कर 28,398 वर्ग मीटर हो गया है ।


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