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    भिंड दतिया लोकसभा सीट पर पार्टी लगा सकती है पिरोनिया पर दांव ?

    दतिया (RamjisharanRai) @www.rubarunews.com>> जिहा भिंड दतिया में हो सकती है  इस नए चेहरे की लांचिग पार्टी जता सकती है भरोसा 
    लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और विधानसभा चुनावों के परिणामों का एनालिसिस करने पर स्पष्ठ है कि ग्वालियर  चंबल में एक्सट्रोएक्ट का काफी असर रहा जिससे भाजपा को मुह की खानी पड़ी जिहा पार्टी लोकसभा में नही लेना चाहती किसी भी तरह का जोखिम पार्टी फुक फुक कर रख रही है कदम
                   भाजपा के नेता भी दबी जुबान में यह स्वीकारने लगे हैं कि केवल ग्वालियर/गुना से यशोधरा राजे सिंधिया और भिंड दतिया से निर्विवाद स्वच्छ छवि सहज उपलब्ध संघ विचारणीय भाजपा संगठन के नकसे कदम चलकर भांडेर से विधायक रहे घनश्याम पिरोनिया  पर भाजपा लोकसभा सीट के लिए दांव लगाने पर बिचार कर रही  है 
                 क्योकि जीस तरह से सीट निकाल सकते हैं हम बात करेंगे रिजर्व सीट भिंड दतिया संसदीय क्षेत्र क़ी !
    अभी 2014 के चुनावों वहां से पूर्व में सीनियर आई ए एस डॉ भागीरथ प्रसाद जी भाजपा से निर्वाचित हुए थे !सबको याद होगा कि 2009 में यही डॉ भागीरथ प्रसाद जी कॉंग्रेस के नेता हुआ करते थे ! कॉंग्रेस के दिग्गी शासन में उन्होनें महत्वपूर्ण बिभाग सम्हाले थे !2009 लोकसभा चुनाव में पहली बार यह सीट रिजर्व हुईं ! कॉंग्रेस में अपनी निष्ठा के चलते डॉ भागीरथ प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया ! भाजपा से संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले श्री लाल सिंह जी आर्य और 2008 के ऐतिहासक संसद के नोट फॉर वोट मामले को उजागर करने श्री अशोक अर्गल जी भाजपा उम्मीदवार क़ी रेस में रहे ! अंत में दिल्ली अर्गल के पक्ष में रही ! बहुत ही नजदीकी मुकाबला हुआ ! सबको याद है कि भिंड दतिया में अच्छे बाहरी दिग्गज धराशाई हुए लेकिन कार्यकर्ताओ में उनको लेकर भी नापसंद नजर आरही है कार्यकर्ताओ से उनकी दुरी होना और कार्यकर्ताओं की अनदेखी उनके लिए भारी  पड़ती हुई नजर आरही है 
     तो भही डॉ भागीरथ प्रसाद को कांग्रेस से भाजपा में फिल्मों क़ी तरह इंट्री कराई गई ! उस समय मध्यप्रदेश भाजपा में डिक्टेटर क़ी तरह शिवराज जी निर्णय लेने के लिए अधिकृत थे !
                    उस समय प्रदेश में भाजपा भी मजबूत थी देश में भी मोदी जी क़ी लहर थी सो डॉ भगीरथ जी भाजपा में शामिल भी हुए और वर्तमान मंत्री इमरती देवी को हराते हुए सांसद भी बने !
                      हालाँकि एक सांसद के तौर पर प्रभावी काम करने वाले डॉ भागीरथ जी पर कोई गंभीर आरोप नहीं हैं लेकिन पूर्व ब्यूरोकेट्स क़ी छवि और कॉंग्रेस क़ी गहरी पृष्ठिभूमि के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं में उनकी स्वीकार्यता नहीं बन पाई ! 
                       बढ़ती उम्र और भाजपा से नए नए जुड़ने के कारण कार्यकर्ताओं को पहचान ना पाने के कारण कार्यकर्ता नाराज तो थे ही रही सही कसर एट्रोसिटि एक्ट पर लोकसभा में उनके भाषण ने पूरी कर दी ! जिससे उग्र स्वभाव के लिए जानें वाले चंबल क्षेत्र में डॉ भागीरथ जी का गाँव गाँव में विरोध शुरू हो चुका है ! यहां तक कि उनको क्षेत्र में भ्रमण के दौरान भी विशेष सुरक्षा में निकलना पड़ रहा है !
                       सबको याद हैं वर्ष 2014 में कॉंग्रेस को एक जोर का झटका धीरे से लगाने वाली भाजपा अब बेकफुट पर है ! क्योंकि मोदी लहर में जिन डॉ भागीरथ प्रसाद जी क़ी नैय्या पार हो गई थी आज क़ी तारीख में वही नैय्या मझदार में फंसी हुईं दिख रही है ! भारी विरोध के चलते भाजपा से टिकिट मिलने क़ी स्थिति में डॉ भागीरथ जी क़ी लाखों से हार होने क़ी आशंका है ! अब भाजपा के सारे थिंक टैंक डिप्रेशन में हैं कि उनको एक तरफ कुंआ हैं तो दूसरी तरफ खाई है ! वो डा भागीरथ को उम्मीदवार बनाते हैं तो उनका विकट विरोध है और उम्मीदवार ना बनाने क़ी स्थिति में इस बात क़ी भी प्रबल संभावना है कि वो फिर से कॉंग्रेस के साथ जा सकते हैं ! वैसे भी उनके कॉंग्रेस के दिग्गज राजा से नजदीकियां जगजाहिर हैं ! अभी अगर कॉंग्रेस से देखा जावे तो इमरती देवी सुमन के अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र बौद्ध के नामों क़ी चर्चा है ! भाजपा से वर्तमान सांसद के अलावा पूर्व सांसद अशोक अर्गल  और पूर्व मंत्री लाल सिंह जी आर्य के नामों क़ी चर्चा है लेकिन जिस तरह से बुरी तरहा से विधान सभा चुनाव हारे लालसिंह को खुद लोकल में उनके क्षेत्र में पार्टी और पार्टी कार्यकर्ता न पसंद करना उनके लिए टिकिट न मिलपाने की बड़ी बजह साबित हो रही है इसकी रिपोर्ट पार्टी फोरम तक रखी जा चुकी है
                    जहां एक तरफ पार्टी का बरिष्ठ नेतृत्व पार्टी  कार्यकर्ता की प्रत्यासी पसंद और बोटर की नब्ज टटोलकर प्रत्यासी चयन के लिए  लगातार संपर्क में लगा हुआ है तो कार्यकर्ता निर्विवाद स्वच्छ छवि सहज उपलब्ध आमजन की पसंद जैसा प्रत्यासी चाहते है
                    जिसकी कसौटी पर घनस्याम पिरौनिया खरे उतरते हुए नजर आरहे है क्योंकि जिस तरह से पिरौनिया ने अपना विधायक का कार्यकाल क्षेत्र की जनता के बीच रहकर किया वह किसी से छुपा हुआ नहीं है
     क्योंकि उनके सरल सहज और ईमानदारी के कारण पहले कार्यकाल में भी जनता उनसे प्रभावित रही ! इस बार विधानसभा जितने के  बाद भी पार्टी द्वारा टिकिट काटने से जनता क़ी सहानुभूति भी उनके साथ है ! लालसिंह जी आर्य भी प्रदेश क़ी राजनीति का बढ़ा चेहरा हैं ! उनके और टिकिट के बीच में गोहद क़ी ताजी पच्चीस हजारा हार आड़े आ रही है अन्यथा लालसिंह जी टिकिट की रेस में नंबर वन पर होते ! कॉंग्रेस और महाराजा के मजबूत होने से कॉंग्रेस भी भाजपा के पिछले प्रहार का बदला लेने को तैयार हैं ! कॉंग्रेस से मजबूत उम्मीदवार ना होने क़ी दशा में यह संभव है कि इस बार कॉंग्रेस भी भाजपा के ही किसी दिग्गज को अपना उम्मीदवार बनाकर पूरे गेम को चेंज करना चाहती है ! वैसे टिकिट किसी भी पार्टी से किसी का भी हो जीत आसान नहीं होगी ! कुल मिलाकर जनता का सर्वे माने तो अभी घनश्याम पिरौनिया क़ी सज्जनता और सहजता के कारण वो जीतने क़ी रेस में सबसे आगे चल रहे हैं ! लेकिन भाजपा उनको टिकिट देगी या नहीं इस पर अभी प्रश्नचिन्ह लगा है !
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