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    सूर्य से प्राप्त होने वाली उर्जा, सूर्यताप कहलाती है-विकास सोनी

    श्योपुर, 23/फरवरी/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> खटीक समाज के सामूदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग में भूगोल विशेषज्ञ ने लेक्चर देते हुए बताया है कि सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा, सूर्याताप कहलाती है। सूर्य से ऊर्जा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगो के रूप में मिलती है सूर्य के बाहरी सतह का तापमान लगभग 6000 डिग्री सेल्सियस होता है। पृथ्वी को इसका 1/2 अरबवाँ भाग प्राप्त होता है। सूर्य से पृथ्वी को ऊर्जा की समान मात्रा प्राप्त होती है इसे सौर स्थिरांक कहते हैं। इसका मान 2 कैलोरी प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रति मिनट है अर्थात 2 लैंजली होती है। यह मात्रा कई कारको पर निर्भर होती हैं। जिसमें आपतन कोण, सूर्य से पृथ्वी की दूरी, दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता आदि कारक प्रमुख हैं। आपतन कोण का मान जैसे जैसे कम होता है वैसे वैसे ही सूर्य से आने वाले ऊर्जा के मान में भी कमी आती है। आपतन कोण विषुवत रेखा पर 90 डिग्री का कोण बनाता है यहाँ पर सूर्याताप का मान सर्वाधिक होता है जबकि ध्रुव की ओर जाने पर आपतन कोण के मान में कमी आती है और वहां पर कम ऊर्जा प्राप्ति होती है। दूसरा कारक सूर्य से पृथ्वी की दूरी है जो 3 जनवरी को पास की होती है और 4 जुलाई को दूर की होती हैं जब सूर्य समीप होता है तो 7 प्रतिशत ज्यादा ऊर्जा प्राप्ति होती हैं और दूर की स्थिति में 7 प्रतिशत कम होती है। तीसरा कारक है दिन के अवधि की लंबाई, जहां दिन की लंबाई ज्यादा होती है वहां ज्यादा ऊर्जा और जहाँ दिन की अवधि छोटी होती है वहां कम। और चौथा कारक है वायुमंडल की पारदर्शिता, जहाँ पारदर्शिता ज्यादा होगी वहाँ सूर्य से ज्यादा प्रकाश और ऊर्जा मिलती हैं पारदर्शिता जहां कम होगी अर्थात जहाँ पर जलवाष्प, धूलकण, और वादल ज्यादा होते हैं वहाँ सूर्य से विकरित होने वाले ऊर्जा की मात्रा कम हो जाती हैं।
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