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    टीबी के गिरावट दर को 1.5% से 5% बढ़ाने के लिये सिर्फ 21 माह शेष


    नईदिल्ली (शोभा शुक्ला और बॉबी रमाकांत, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) @www.rubarunews.com>>हालांकि भारत समेत 193 देशों की सरकारों ने 2030 तक टीबी उनंमूलन का वादा तो सितम्बर 2015 की संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया था, पर टीबी का जो वर्तमान वैश्विक गिरावट दर है, वह 2030 तक टीबी समाप्ति के लिये कदापि पर्याप्त नहीं है। पिछ्ले हर साल की विश्व स्वास्थ्य संगठन रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक टीबी गिरावट दर अत्यंत शिथिलता के साथ बहुत कम बढ़ रहा है। वर्तमान वैश्विक टीबी गिरावट दर 1.5% पर रेंग रहा है। 2030 तक दुनिया से टीबी समाप्त करने के लिये 2020 तक टीबी गिरावट दर 5% और 2025 तक 10% होना चाहिये। 
    भारत के समक्ष चुनौती गम्भीर  
              भारत के समक्ष चुनौती गम्भीर है क्योंकि न केवल विश्व में सबसे अधिक टीबी रोगी भारत में हैं, बल्कि भारत सरकार ने 2030 नहीं बल्कि 2025 तक ही टीबी उनंमूलन का सपना सच करने का वादा किया है। सतत विकास और स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो नि:संदेह टीबी उनंमूलन सभी सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिये। 
    थाईलैंड का वर्तमान टीबी गिरावट दर 10%  
            कुछ देश ऐसे हैं जिन्होनें टीबी गिरावट दर में अनुकर्णीय बढ़ोतरी की है। थाईलैंड का वर्तमान टीबी गिरावट दर 10% है जबकि यह लक्ष्य अधिकांश देश 2025 तक हासिल करने का सपना देख रहे हैं। 
    थाईलैंड में जब टीबी गिरावट दर अनेक गुणा बढ़ा तो अनेक जन स्वास्थ्य लाभ देखने को मिले। दवा प्रतिरोधक टीबी के दर में भी 13% गिरावट आयी, टीबी मृत्यु दर में कमी आयी और इलाज सफलता में इजाफा हुआ।
             थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री प्रोफेसर पियासकूल सकूलसतायदोर्न ने सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) को विशेष साक्षात्कार में बताया कि उनके देश में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एन्ड-टीबी (टीबी उनंमूलन) नीति को पूर्णत: लागू करने से ही टीबी महामारी पर अंकुश लग रहा है। थाईलैंड के राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम ने एक लम्बा सफर तय किया है जो अब टीबी उनंमूलन की दिशा में अग्रसर है।
            भारत में भी टीबी उनंमूलन को राजनीतिक रूप से सबसे उच्च स्तरीय समर्थन है। प्रधानमंत्री ने स्वयं 2025 तक टीबी उनंमूलन के वादे को दोहराया है। भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भी 2025 तक टीबी उनंमूलन का लक्ष्य अंकित है। भारत में पिछ्ले सालों में टीबी कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और कार्यसाधकता बढ़ी है परंतु 2025 तक टीबी उनंमूलन के लक्ष्य हासिल करने के लिये हमें टीबी रोकधाम के विभिन्न पहलुओं पर अनेक गुणा अधिक सफलता प्राप्त करनी है। 
              थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री प्रोफेसर पियासकूल ने कहा कि उनके देश में भी टीबी उनंमूलन को राजनीतिक रूप से सबसे उच्च-स्तरीय समर्थन है जिसके कारणवश अनेक वर्गों में बेहतर समन्वय और संयुक्त कार्यक्रम का ही नतीज़ा है कि टीबी नियन्त्रण में सराहनीय सुधार हुआ है।
             थाईलैंड केबिनेट ने न सिर्फ राष्ट्रीय टीबी नीति को पारित किया है बल्कि अधिक बजट भी मुहैया करवाया है जिससे कि जिन समुदाय में टीबी होने का खतरा अधिक है उनतक अत्याधुनिक जाँच और सही इलाज सेवा पहुंच सके। 'जीन एक्सपर्ट' जाँच आदि की उपलब्धता बढ़ी है, खासकर कि उन लोगों के लिये जिन्हें टीबी का खतरा अधिक है जैसे कि जो लोग जेल में हैं।
               थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री पियासकूल सकूलसतायदोर्न ने सीएनएस को बताया कि उनके देश ने 2017-2021 टीबी उन्मूलन के लिये ओपरेशनल प्लान भी विकसित किया है जिसकी 5 मुख्य नीतियाँ हैं: 1) जिन लोगों को टीबी का खतरा अधिक है उनतक 100% टीबी की अत्याधुनिक जाँच पहुंचे, सही इलाज और सेवा मिले; 2) टीबी मृत्यु दर कम हो; 3)
             टीबी से बचाव, जाँच, इलाज, देखभाल, नियन्त्रण आदि के लिये ज़रुरी मानव-संसाधन में विकास हो; 4) टीबी प्रबंधन को बेहतर नीति और सतत ढांचे में ढालना; 5) टीबी से बचाव, इलाज और नियन्त्रण के लिये ज़रुरी शोध और उद्यमता को बढ़ावा देना। 
    शोधकार्य तेज़ी से सक्रिय रहे 
            टीबी के लिये पक्की जाँच तो अनेक दशकों से है जैसे कि 'सॉलिड कल्चर' पर यह जाँच सिर्फ बड़े चिकित्सा विश्वविद्यालय या अस्पताल में ही उप्लब्ध है और रिपोर्ट आने में 2-3 महीने का समय लगता है। 'लिक़ुइड कल्चर' जाँच भी सिर्फ बड़े अस्पताल में उप्लब्ध है और रिपोर्ट आने में 2-3 सप्ताह लगता है। नयी जाँच जैसे कि 'जीन एक्सपर्ट' या 'लाईन प्रोब ऐसे' आदि की उप्लब्धता बढ़ी है। भारत के हर जिले में जीन एक्सपर्ट जाँच उप्लब्ध है जो 100 मिनट में टीबी रोग और रिफाम्पिसिन दवा से प्रतिरोधकता की पक्की रिपोर्ट देती है।
            पर शोधकार्य को तेज़ करके ऐसी जांच ज़रुरी हैं जो शहरी या ग्रामीण, छोटे या बड़े अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर सरलता से की जा सके।
            टीबी के लिये बेहतर जाँच ही नहीं ज़रुरी हैं बल्कि बेहतर इलाज भी ज़रुरी है। यदि दवा प्रतिरोधकता न हो तब भी टीबी का इलाज 6-9 महीने चलता है और दवाएं कारगर और जीवनरक्षक तो हैं परन्तु उनके कुपरिणाम अक्सर रोगी के लिये कष्ट पैदा करते हैं। दवा प्रतिरोधक टीबी का इलाज तो 2 साल (या अधिक) लम्बा चलता है, दवाओं से टीबी ठीक तो हो सकती है पर कुपरिणाम गम्भीर हैं और इलाज सफलतादर भी असन्तोषजनक है।
            इसलिए टीबी उन्मूलन के लिये ज़रुरी है कि बेहतर जाँच, और कम-अवधि और बिना कुपरिणाम के रामबाण इलाज के लिये शोधकार्य तेज़ी से सक्रिय रहे। टीबी के लिये प्रभावकारी वैकसीन भी ज़रुरी है जिसके लिए शोधकार्य में ढील नहीं आनी चाहिये।
             भारत सरकार ने इसी दिशा में शोध कार्य बढ़ाने के आशय से भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के तहत इंडियन टीबी रिसर्च कनसोर्शियम का गठन किया है।
           थाईलैंड सरकार ने इस दिशा में शोध को बढ़ावा देने के आशय से   राष्ट्रीय टीबी रिसर्च नेटवर्क ('थाईटर्न') का गठन किया है। 2017 में थाईटर्न ने सर्वप्रथम राष्ट्रीय रोडमैप जारी किया जो देश के परिप्रेक्ष्य में टीबी शोध प्राथमिकताओं को चिन्हित करता है। इस शोध कार्य में स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त करना और दवा प्रतिरोधकता पर विराम लगाना भी शामिल हैं।
           विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) से कहा कि जब तक टीबी के लिये नयी अधिक प्रभावकारी जाँच, बेहतर इलाज और वैकसीन नहीं आयेंगी तब तक टीबी उन्मूलन के सपने को साकार करना असम्भव प्रतीत होता है। नयी जाँच ऐसी हो जो जहां रोगी है वहीं पर पक्की रिपोर्ट दे, नया इलाज ऐसा होना चाहिये जिससे हर टीबी रोगी (भले ही उसे दवा प्रतिरोधक टीबी हो) कम इलाज-अवधि में पक्की तरह से ठीक हो सके। टीबी से बचाव के लिये प्रभावकारी वैकसीन अत्यंत ज़रुरी है।  
    लेटेन्ट टीबी की पक्की जाँच और इलाज के लिये भी शोधकार्य तेज़ होना चाहिये 
             डॉ स्वामीनाथन ने कहा कि लेटेन्ट टीबी की पक्की जाँच और इलाज के लिये भी शोधकार्य तेज़ होना चाहिये। लगभग एक-तिहाई मानव जनसंख्या को लेटेन्ट टीबी है जिसका तात्पर्य है कि टीबी कीटाणु से वह लोग संक्रमित तो हैं परंतु कीटाणु रोग उत्पन्न नहीं कर रहा है।
              हर टीबी रोगी पहले लेटेन्ट टीबी से संक्रमित होता है जो रोग में परिवर्तित हो जाती है। इसीलिये यदि टीबी उन्मूलन का सपना पूरा करना है तो हर टीबी रोगी के सफल उपचार के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लेटेन्ट टीबी का इलाज भी पक्का हो। 
    टीबी कार्यक्रम का बजट देश के अंदर के संसाधनों से अर्जित होता है या विदेशी चंदे या कर्जे से? 
                टीबी कार्यक्रम का बजट देश के अंदर के संसाधनों से अर्जित होता है या विदेशी चंदे या कर्जे से, यह भी महत्वपूर्ण पहलू है।
    2015-2017
    के दौरान थाईलैंड के टीबी बजट में राष्ट्रीय निवेश 200% बढ़ा है।
           थाईलैंड स्वास्थ्य मंत्री पियासकूल सकूलसतायदोर्न ने सीएनएस से कहा कि देश के भीतर के संसाधनों को टीबी बजट के लिये उप्लब्ध करवाने में उद्यमता के साथ-साथ विभिन्न वर्गों को बीच बेहतर समन्वयन की भी केंद्रीय भुमिका है। उदाहरणस्वरुप उन्होनें बताया कि जेल में रह रहे लोगों के लिये टीबी रोकधाम सेवा पहुंचाने में न्याय मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यालय के मध्य समन्वयन आवश्यक है।
         थाईलैंड में टीबी कार्यक्रम की सफलता वहाँ दशकों से लागू स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली पर भी अधारित रही है।
            विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि यदि स्वास्थ्य प्रणाली मज़बूत होगी तो निश्चित तौर पर इसका सकारात्मक प्रभाव रोग नियन्त्रण कार्यक्रम पर भी पड़ेगा ।
              मेग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित वरिष्ठ सामजिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडेय ने कहा कि बिना हर नागरिक के लिये समाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं होती तब तक सिर्फ टीबी उन्मूलन कैसे सम्भव है? जर्जर समाजिक सुरक्षा या कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली न सिर्फ टीबी होने का खतरा बढ़ाती है बल्कि टीबी नियन्त्रण को बाधित करती है। 
    छठा स्वास्थ्य विषय 2019 की संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल  
              संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने इतिहास में सिर्फ 5 मर्तबा स्वास्थ्य विषय को उच्च स्तरीय बैठक के ऐजेंडा में लिया है: एड्स, इबोला, दवा प्रतिरोधकता, गैर संक्रामक रोग, और टीबी। छठा स्वास्थ्य विषय 2019 की संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल  होने को है: सबको स्वास्थ्य सेवा मिलना। थाईलैंड के इस दिशा में योगदान को मद्देनज़र रखते हुए उसे हंगरी देश के साथ इस उच्च स्तरीय बैठक का सह-संचालन करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।
               2018
    की संयुक्त राष्ट्र महासभा में टीबी पर उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें देश के प्रमुखों ने राजनैतिक घोषणापत्र जारी किया था। वैश्विक स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के डॉ लुचिका दितियू, डॉ सुवानंद साहू, और डॉ अलिमुद्दीन जुमला ने प्रतिष्ठित जन-स्वास्थ्य जर्नल 'द लैनसेट' में प्रकाशित लेख में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की टीबी पर उच्च स्तरीय बैठक के बाद वांछित परिणाम 3 स्तम्भों पर टिके हैं: बजट, सक्रिय कार्यक्रम और जवाबदेही।
              हर नया टीबी संक्रमण इस बात का प्रमाण है कि संक्रमण नियन्त्रण असफल हो रहा है। टीबी उन्मूलन आखिरकार सतत विकास की आधारशिला पर ही तो टिकेगा इसलिये यह अत्यंत ज़रुरी है कि सभी वर्ग आपसी साझेदारी में कुशल समन्वयन के साथ अपना भरसक योगदान दें।


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