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    समय की मांग है, किफायती कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली विश्वस्तरीय दवाओं की उपलब्धताः उपराष्ट्रपति


    नईदिल्ली (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> उपराष्ट्रपति श्री एम. वैकेंया नायडू ने कहा कि आज किफायती कीमत पर उच्च स्तर वाली विश्वस्तरीय दवाओं की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय दवा उद्योग से दवा निर्माण में उच्च स्तर तथा गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। दवा निर्माण के लिए वैश्विक मानदंडों का अनुपालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग को नये अणुओं और नयी दवाओं के अनुसंधान के लिए संसाधनों की रूपरेखा बनानी चाहिए।
              आज हैदराबाद में सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के दूसरे दशक समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। प्रतिदिन स्वास्थ्य से संबंधित नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसमें गैर संचारी बीमारियां, जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां और कैंसर शामिल है।
             उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर जेनरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है और एड्स से लड़ने के लिए एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं की आपूर्ति करता है।
            श्री नायडू ने विकासशील देशों में किफायती जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय कंपनियों की सराहना की।
           उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत को जेनरिक दवा निर्माण क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले देश के रूप में देखना चाहते है। इसके लिए युवा शोधार्थियों को चिकित्सा की भारतीय प्राणाली के मानकीकरण  के लिए कार्य करना चाहिए। उन्हें पारम्परिक  दवाओं की कार्य कुशलता, वैधता और प्रभावशीलता स्थापित करने के लिए वैश्विक प्रयोग-प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए।
            श्री नायडू ने कहा कि दवा कंपनियों को अल्प-ज्ञात बीमारियों से निपटने के लिए नये अणुओं और नयी दवाओं का विकास करना चाहिए। इन बीमारियों को दुर्लभ  बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है।
             उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों को संख्या 7 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। दवा उद्योग को दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए किफायती दवाओं को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
             श्री नायडू ने कहा कि बाजार में जेनरिक दवाओं की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम, जीवन रक्षक दवा तथा रोकथाम के लिए टीकाओं पर सरकार के साथ-साथ दवा कंपनियों को भी ध्यान देना चाहिए। भारत में चिकित्सा शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जाना चाहिए।
           उन्होंने कहा कि दवा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और 2020 तक यह 55 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। केन्द्र तथा राज्य सरकारों को दवा उद्योग की विकास क्षमता का उपयोग युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए करना चाहिए।
            उपराष्ट्रपति ने कहा कि दवा उद्योग पर लोगों के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी है। दवा कंपनियों को अपनी सीएसआर गतिविधियों से आगे जाकर गरीबों को किफायती कीमत पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
             उपराष्ट्रपति ने एग्जिबिशन सोसायटी की सराहना करते हुए कहा कि सोसायटी ने शिक्षा  के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है। सोसायटी ने स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक के 18 संस्थानों की स्थापना की है। पिछले 75 वर्षों के दौरान तेलंगाना में सोसायटी ने बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। इन संस्थानों में 30 हजार छात्र/छात्रा शिक्षा ग्रहण कर रहे है। उपराष्ट्रपति ने 10 मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किये।
             इस अवसर पर सरोजिनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय के चेयरमैन श्री वी. वीरेन्द्र, सचिव श्री आर. सुकेश रेड्डी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


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