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    लोकसभा चुनाव में युवाओं के लिए ‘पॉलिटिकल’ तराने




    नईदिल्ली (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> बॉलीवुड और राजनीति का गहरा रिश्ता है फिर चाहे बात अभिनेताओं के नेता बनने की हो या फिर फिल्मी गानों पर सियासी पैरोडी की. पहले भी कई गाने सियासी संग्राम के हथियार बन चुके हैं. महंगाई पर महंगाई डायन वाला गाना अब भी कई मंचों पर सुनाई देता है. हाल ही में आई रणवीर सिंह की फिल्म गली ब्वॉय का आजादीगाना सबने देखा सुना होगा. इस आजादी वाले गाने पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों का  दिल आ गया था.
                  
    देश में चुनाव और चुनाव प्रसार अपने चरम पर है. न्यूज़18 इंडिया की एक खास रिपोर्ट के अनुसार देश की 2 बड़ी पार्टियां सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी बढ़त बनाने की जुगत में जुटी हुई हैं। चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया सबसे नया और असरदार हथियार है, इसलिए चुनाव का एलान होने से पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बीजेपी और कांग्रेस के बीच जंग का मैदान बना हुआ है। 2019 के चुनाव के लिहाज से पहला वार कांग्रेस की ओर से हुआ और इस वार के लिए इस्तेमाल की गई गली ब्वॉय फिल्म के आजादी वाले रैप सॉन्ग की पॉलिटिकल पैरोडी.
                  राजनीति में संकेतों, प्रतीकों नारों और गानों की खास जगह होती है. ऐसे में दोनो पार्टी अपनी-अपनी आजादी की बात कर रहीं हैं. आजादी तो सन 47 में ही आ गई थी पर प्रतीकों के जरिये जहाँ कांग्रेस ने अपने विडियो में बीजेपी की नीयत पर सवाल उठाए वहीं बीजेपी के विडियो में भी गांधी-नेहरू परिवार से आजादी की बात की गयी है.
                 बीजेपी और कांग्रेस के जंग में इंसाफ की हुंकार है, आजादी के नारे हैं लेकिन निशाना है उन नौजवानों पर, जो सोशल मीडिया पर लंबा वक्त गुजारते हैं. चुनाव में यूथ वोटर बड़ा फैक्टर साबित होने वाले हैं, इसका अंदाजा बीजेपी और कांग्रेस, दोनों को है. लोकसभा चुनाव के लिए  प्रचार को लेकर सभी पार्टियों ने अलग-अलग तरीकों का सहारा लिया. विचारधारा की इस लड़ाई के बीच 2019 की चुनावी महफिल में तमाम तरह के तराने गूंज रहे है. गाने की विधा रैप मे ही बीजेपी ने एक और गाना बनवाया, जो तुरंत ही वायराल हो गया. गाने का नाम थे बन्दा अपना सही है.
                   2014 के चुनाव में बीजेपी का सबसे घातक हथियार सोशल मीडिया ही था। युवा वोटरों पर मोदी का ऐसा जादू चला कि कांग्रेस कहीं की नहीं रही। कांग्रेस को सोशल मीडिया की ताकत थोड़ी देर से समझ में आई। एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को उसी के अंदाज में हराया, जमीन पर दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाला, तो सोशल मीडिया पर राजनीतिक तानों से भरे तरानों ने.
                      अब कांग्रेस लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर सियासी बमबारी कर रही है तो बीजेपी के सोशल मीडिया सेनानी भी डटे हुए हैं. इस दिलचस्प राजनीतिक जंग का परिणाम तो 23 मई को ही पता चलेगा.


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