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    129 वर्षीय संतश्री स्वामी देवनायकाचार्य समदर्शी महाराज का चातुर्मास व्रत 17 जून से


    दतिया(RamjisharanRai) @www.rubarunews.com>>  विश्व के एकमात्र सशहस्त्रफ़नधारी शेषनाग मन्दिर श्रीरामानुज धाम आश्रम के अधिष्ठाता अनन्तश्री विभूषित स्वामी देवनायकाचार्य समदर्शी महाराज 129 वर्षीय  एक बार फिर से अपना चातुर्मास व्रत दतिया में बिताएंगे। 
    दतिया में स्वामी जी का यह पांचवा चातुर्मास व्रत है। 
           शुक्रवार को श्रीरामानुज धाम आश्रम पर श्रद्धालुओं को गीता प्रवचन देते हुए स्वामी जी ने कहा कि आत्मा अविनाशी है और शरीर नाशवान है। आत्मा किसी काल में न तो जन्म लेती है न मरती है। यह न उत्तपन्न होकर फिर होने वाली है। शरीर के नष्ट हो जाने के बाद भी यह नहीं मारी जाती।  उन्होंने कहा कि व्यक्ति सांसारिक सुखों के वशीभूत होकर परमात्मा से विमुख हो जाता है।  श्रीमद भागवतगीता जीवात्मा का  परमात्मा से साक्षात्कार करती  है।
    दतिया में है विश्व का एकमात्र सशहस्त्रफनधारी भगवान शेषनाग मन्दिर 
           दतिया जिला मुख्यालय से महज 7 किमी दूर ग्वालियर झांसी रोड नवीन कलेक्ट्रेट के पास श्रीरामानुज धाम आश्रम पर विश्व का एकमात्र सशहस्त्रफनधारी भगवान शेषनाग जी का मंदिर स्थापित है। सफेद संगमरमर पर एक ही शिलाखण्ड के उपयोग से बनी विशाल प्रतिमा जयपुर के कुशल कारीगरों की उत्कृष्ठ मूर्ति कला का बेजोड़ नमूना है। 
            श्रीरामानुज धाम आश्रम के अधिष्ठाता अंन्तश्री विभूषित स्वामी देवनायकाचार्य जी के दिव्य स्वप्न में चक्रवर्ती सम्राट भगवान शेषनाग जी द्वारा सहशस्त्र फन के साथ दर्शन दिए जाने के उपरांत उक्त दिव्य स्वरूप को स्मृति में रख स्वामी जी द्वारा सहशस्त्रफ़नधारी भगवान शेषनाग के विग्रह का निर्माण करवाया है। आश्रम पर इस दिव्य मूर्ति की पूजा अर्चना व दर्शनों के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 
    दिव्य मूर्ति की स्थापना के लिए विशाल मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है।
    मन्दिर निर्माण के लिए अध्यात्म नगरी दतिया को चुना 
           सशहस्त्रफ़नधारी भगवान शेषनाग जी का  मंदिर निर्माण के लिए स्वामी जी ने  बुन्देलखण्ड की वीर धरा में से आध्यात्मिक नगरी दतिया को चुना। दतिया आध्यात्मिक गुरुओं सन्तों की पुरातन नगरी है। यहां महाभारत काल से अश्वरथामा का प्रसंग जुड़ता है। 
    5 साल से चल रहा अखण्ड अनवरत गीता पाठ 
            श्रीरामानुज धाम आश्रम पर श्रीमद्भागवत गीता का  अखण्ड अनवरत पाठ पिछले 5 साल से चल रहा है। प्रतिदिन अलग अलग यजमानों के नाम से गीतापाठ होता है। इसके आजीवन सदस्य स्वामी जी के शिष्य व देश के कोने कोने से जुड़े श्रद्धालु है। गीतापाठ का प्रतिफल व्यक्ति व उसके परिवार के लिए कल्याणकारी है।गीता के 18 अध्यायों के श्लोकों का सस्वर उच्चारण आस पास के वातावरण को शांत व कांतिमय बनाता है।


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