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    भीमलत बनेगा ईको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र, प्राकृतिक घाटी को आकर्षक बनाने के लिए 60 लाख स्वीकृत......

    बूंदी (KrishnaKantRathore) @www.rubarunews.com>> जिले के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटक स्थल भीमलत महादेव व उससे जुड़े अभयपुरा वेट लेंड को शीघ्र ही अब ईको-टूरिज्म की दृष्टि से अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद बंधी है। डीएफएमटी मद के तहत ईको टूरिज्म विकास के लिए जिला प्रशासन ने भीमलत क्षेत्र के सौदर्याीकरण एवं अभयपुरा वेटलेंड को पक्षी दर्शन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 60 लाख रूपयें की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। 
                         वन विभाग ने भीमलत-अभयपुरा ईको-टूरिज्म विकास के तहत यहां कराए जाने वाले कामों के प्रस्ताव तैयार कर लिए है तथा शीघ्र ही राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक( होफ) को भेजे जाएंगे जहां से वित्तीय स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगें। जिले के इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के विकास एवं सौंदर्यीकरण से यहां देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढेगी तथा बूंदी आने वाले सेलानी यहां की समृद्ध पर्यावरणीय सम्पदा एवं वन्यजीवों की अठखेलियां निहार सकेंगे, जिससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे व जिले सहित हाड़ौती का पर्यटन व्यवसाय बढेगा। उल्लेखनीय हैं कि राज्य सरकार ने सत्र 2012-13 में जिले के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटक स्थल भीमलत-अभयपुरा क्षेत्र को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए  50 लाख का बजट स्वीकृत किया था लेकिन 5 साल गुजर जाने के बाद भी अब तक मात्र तीन-चैथाई बजट का ही उपयोग हो पाया है। इससे पूर्व 2008-09 में भी इस सुंदर वैली के सोंदर्यीकरण पर 22 लाख खर्च किए जा चुके है लेकिन विभागीय सामंजस्य के अभाव व प्रशासनिक उदासीनता के कारण अभी तक यहां पर्यटक गतिविधियां सुचारू तरीके से शुरू नहीं हो पायी है। क्षेत्र में भीमलत जल प्रपात के अलावा, प्रागेतिहासिक शेल चित्र, बाण गंगा, भाला कुई, सीता कुण्ड, शिकार बुर्ज, खण्डेरियां महादेव, रेल्वे सुरंग, अधर शिला तथा प्राचीन बस्ती के अवशेष है जिनसे विदेशी ही नहीं अपितु देशी पर्यटक व स्थानीय लोग भी महरूम है। अब उम्मीद जगी है कि इस क्षेत्र को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने से यहां पर्यटन गतिविधियां बढेगी तथा भीमलत व बूंदी शीघ्र ही हाड़ौती पर्यटन सर्किट से जुड़कर  अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उभरेगे। 
    बनेंगे प्रवेश द्वार, वाच टावर से निहारेंगे प्रकृति की छटा..........
                        भीमलत-अभयपुरा ईको-टूरिज्म विकास के तहत यहां कराए जाने वाले प्रस्तावित कार्यों में बूंदी व भीलवाड़ा जिले में मुख्य सड़क पर दो बड़े प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, साथ ही भीमलत क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन व पौराणिक स्थलों को दर्शाने वाला बड़ा संकेत वृक्ष बनाया जाएगा। इसके अलावा यहां 600 मीटर सीसी रोड़, एक किलोमीटर रेलिंग, चार कचरा पात्र व इको ट्रेल भी बनाई जाएगी। पूर्व में कराए गए विकास कार्यों में शेष रहे एवं अन्य काम भी कराए जाएंगे।
    मछली ठेका बना पर्यटकों के पक्षी-दर्शन में बाधक.....
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                        सदाबहार जल प्रपात के साथ भीमलत-अभयपुरा ईको टूरिज्म क्षेत्र के अभयपुरा वेटलेंड व भीमलत वैली में वर्ष भर पानी भरा रहता है तथा गिद्दों के अलावा सेकड़ों प्रजाति के देशी-विदेशी पक्षियों की मोजूदगी यहां वर्ष भर रहती है, जो ईको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र सिद्ध हो सकता है। लेकिन अभयपुरा बांध में मछली ठेका होने से ठेकेदार के कार्मिक इन पक्षियों को बांध में टिकने नहीं देते है तथा मछली ठेके की आड़ में पशु-पक्षियों का शिकार भी होता है जिससे पर्यटकों को पक्षी दर्शन से महरूम होना पड़ रहा है, साथ ही ईको-टूरिज्म के रूप में खर्च राशि का भी सदुपयोग पहीं हो पा रहा है। यह वेटलेंड उदयपुर व चित्तौड़गढ से बूंदी आने वाले पर्यटकों के लिए आसान पहुंच वाला स्थान है तथा मुख्य सड़क व रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है।  
    इनका कहना है 
                      भीमलत क्षेत्र में पर्यटकों के लिए सुरक्षा व सुविधओं की कोई व्यवस्था नहीं है। वर्ष भर जल उपलब्धता के कारण पक्षियों से आबाद रहने वाले व  पक्षियों के लिए उत्तम आवास अभयपुरा बांध में मछली ठेका निरस्त कर यहां पर्यटन गतिविधियां प्रारम्भ होनी चाहिए इससे जिले में ईको टूरिज्म को बढावा मिलेगा तथा वन्यजीवों व पक्षियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी - 
    पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक, बूंदी
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