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    प्रत्येक जीव या आत्मा चार गुण ज्ञान, दर्शन, शक्ति, आनंद से युक्त होती है - नायब तहसीलदार

    श्योपुर 28/जून/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>बड़ौदा के नायब तहसीलदार एनके दादौरिया ने जैन दर्शन समझाते हुए कहा है कि जैन मतानुसार प्रत्येक जीव या आत्मा अनंत चतुष्टय या चार गुणों से युक्त होती है जो इस प्रकार है ज्ञान, दर्शन, शक्ति और आनंद। वे खटीक समाज के सामूदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग के छात्र छात्राओं से इथिक्स के अंतर्गत दर्शन पर चर्चा कर रहे थे।
                     नायब तहसीलदार एनके दादौरिया ने कहा कि बंधन चतुष्टय को ढक लेता है। जीव शरीर से संयोग का प्रयास करता है। शरीर निर्माण पुद्गल कणो से होता है। जीव, पुद्गल, संयोग, बंधन आदि से मुक्ति से ही मोक्ष है। उन्होंने बंधन के कारणों को समझाते हुए कहा कि अज्ञानता या अविध्या के वजह से ही व्यक्ति के मन में वासनाएं या लालसाएं पनपती है। (क्रोध, मान /घमंड, लोभ माया)। जीव किन पुद्गल कणों से जुड़ेगा यह उसके पुर्नजन्म के कर्म निर्धारित करते हैं। शरीर और जीव को कर्म जोड़ता है। बंधन प्रक्रिया स्तर में बताया कि जीव की ओर पुद्गल कणों का बहना आस्रव तथा पुद्गलो का जीव संयोग उपरांत जकड़ना बंध कहलाता है। मोक्ष स्तर समझाते हुए कहा कि नये पुद्गलो को जीव की ओर आकर्षित होने से रोकना संवर तथा पुराने पुद्गलो का विनाश(पूर्ण मोक्ष प्राप्ति) फलस्वरूप अनंत चतुष्टय की प्राप्ति। मोक्ष प्राप्ति के साधनों को समझाते हुए बताया कि त्रिरत्न और पंच महाव्रत से मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक आचरण त्रिरत्न कहे जाते हैं। पंच महाव्रत में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य है।
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