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    बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सीआरओ की कार्यशाला सम्पन्न

    भोपाल(Dr.RamjisharanRai) @www.rubarunews.com- बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने व जिलों में बच्चों को प्राप्त अधिकारों की वास्तविक स्थिति जानने हेतु प्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपी नगर में स्थित  होटल विज्ञश्री में चाइल्ड राईट्स ऑब्जर्वेटरी (सीआरओ) संस्था भोपाल के तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। आयोजित कार्यशाला में विशेष रूप से संस्था की अध्यक्ष  निर्मला बुच, यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी उपस्थित थे। इसके अलावा मप्र के अलग-अलग जिलों से सीआरओ एव संस्था द्वारा गठित बाल अधिकार मंच के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
                जिला बाल अधिकार फोरम इंदौर से विकास शर्मा, दतिया से बलवीर पांचाल, ग्वालियर से श्रीप्रकाश निमराजे, श्योपुर से प्रमोद तिवारी, झाबुआ जिले से रामप्रसाद वर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता कैलास भाबोर सम्मिलित हुए।
                      कार्यशाला में संस्था की सीआरओ के अध्यक्ष निर्मला बुच ने कहा कि मप्र में बच्चों के लिए किए जा रहे कई प्रयासों के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके लिए सरकार, सिविल सोसायटी और समुदाय को मिलकर कार्य करना होगा। नई रणनीति तैयार करना होगी।
                     यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ गुलाटी ने कहा कि बाल अधिकार समझौते के 30 वर्ष पूर्ण हो गए है। बच्चों की स्थितियां पहले से बेहतर हुई है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां है, जिन्हें दूर करना है। सायबर अपराधो के विषेषज्ञ एआईजी संदीप गोयनका ने बच्चां के साथ हो रहे सायबर क्राईम एवं उससे बचाव के तरीके बताएं। दो दिवसीय कार्यषाला में महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर संचालक राजपाल कौर, डॉ. शीला भंबल, डॉ. आलोक रंजन चौरसिया, शिक्षाविद् डॉ. उदय जैन, एआईजी महावीर, शालिनी दीक्षित, काउंसलर सुदिन, रश्मि सारस्वत सहित 21 जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
                     कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु व्यापक जानकारी देते हुए प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा की वर्तमान स्थिति पर आंकड़े प्रस्तुत करते हुए इनमें आवश्यक सुधार व कठोर कानून व नियमों की आवश्यकता जताई। इस हेतु समुदाय स्तर से प्रभावी पैरवी करने पर जोर दिया ताकि बालमित्र माहौल बन सके।
    इसके अतिरिक्त जिले में सैकड़ों बच्चें बाल श्रमिक के रूप में रेस्टोंरेट, होटलों, ढ़ाबों गैरेजों, पर कार्य करने से वे ना तो स्कूल जा रहे है और साथ ही आर्थिक, शारीरिक शोषण का शिकार होकर अपने स्वास्थ्य के प्रति भी समय पर ध्यान नहीं दे पाते है। जिले के पुलिस थानों और चौकियों पर पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों बच्चों के गुमशुदगी और अपहरण के मामले दर्ज है, जिसमें पुलिस प्रशासन उनकी खोजबीन नहीं कर पाया है। यह सभी चिंताजनक विषय है, जिसकी ओर शासन-प्रशासन को ध्यान देने के साथ सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। सभी प्रतिनिधियों ने प्रोजेक्टर से एलईडी के माध्यम से अपना-अपना प्रस्तुतिकरण किया।
    अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने जिला बाल अधिकार मंच द्वारा आगामी छः माही कार्ययोजना बनाई ताकि सभी जिलों में एकरूपता सहित गतिविधियों का संचालन ही सके। 
               आयोजित कार्यशाला के समापन पर पधारे सभी उपस्थित स्रोत व्यक्तियों व विभिन्न जिलों के सम्मिलित जिला बाल अधिकार फोरम प्रतिनिधियों के प्रति आभार सीआरओ संस्था के अनुराग त्रिपाठी ने व्यक्त किया गया। उक्त जानकारी जिला बाल अधिकार मंच (DCRF) दतिया के कन्वीनर रामजीशरण राय ने दी।
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