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    जो ठान लिया वही किया और बन गया आईपीएस-पुलिस अधीक्षक नागेन्द्र सिंह

    श्योपुर 4/अगस्त/2019 (rubaru desk) @www.rubarunews.com
    श्योपुर के पुलिस  नागेन्द्र सिंह ने कहा है कि एक बार मन में ठान लिया वही किया और आईपीएस बन गया। वे आज खटीक समाज के सामूदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग के छात्र छात्राओं सफलता के मंत्र बतलाने के दौरान संबोधित कर रहे थे।
                    इस दौरान मार्गदर्शक एवं समन्वयक परीक्षित भारती, कलेक्ट्रेट कार्यालय अधीक्षक बाबूलाल आर्य, सहायक समन्वयक खेमराज आर्य, भूगोल विशेषज्ञ विकास सोनी, विशेषज्ञ राजू सिंह कुशवाह और छात्र छात्राएं उपस्थित थे। 
                पुलिस कप्तान नागेन्द्र सिंह ने बताया कि सिलेबस के अनुसार एक टोपिक को पढने के लिए एक ही मटेरियल को पकड़ो और उसे अनेक बार पढो, जब तक की वह टोपिक क्लीयर नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी निरंतर जारी रहे इसके लिए जुनून होना चाहिए। यह जुनून चिंगारी का काम करता है और रुकने नहीं देता है चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। उन्होंने कहा कि जुनून के साथ साथ भय भी चलता है। इसको दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। उन्होंने बताया कि बिना कोचिंग संस्थान से जुड़े भी सफलता अर्जित की जा सकती है। मैं और मेरे दो दोस्त इसके उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि हम भी तीन लोग तैयारी करते थे। हम तीनों दोस्त दिनभर का टार्गेट तय करते थे और फिर सायं को खाने की टेबल पर तीनों दोस्त गहराई से प्रश्न पूछते थे मतलब मंथन करते या यूं कहें कि शास्त्रार्थ करते थे और किसी दिन किसी सवाल का जवाब नहीं दे पाते तो रात भर नींद नहीं आती थी और सोचते थे कि मैं क्यों नहीं बता पाया और अगले दिन के लिए बहुत अधिक मेहनत करते थे। यही जुनून है जिसने तीनों में से दो को आईपीएस और एक को आईएएस बना दिया, इसी तरह आप भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पृष्ठभूमि से आप ताल्लुक रखते हैं यह मायने नहीं रखता है, जबकि मायने आपकी मेहनत रखती है जो हर हाल में परिणाम देती है, लेकिन परिश्रम ईमानदारी से होना चाहिए। 
                   पुलिस अधीक्षक नागेन्द्र सिंह ने बताया कि नर्वस होना गलत बात नहीं है, बल्कि गलत है उससे बाहर नहीं आना। मैं जब पहली बार प्रारंभिक परीक्षा में बैठा और पहला प्रश्न देखकर नर्वस हुआ, मैंने वह प्रश्न सही किया और उस नर्वस क्षण से बाहर आया और प्रश्न हल करता चला गया और प्रि निकला, फिर मुख्य परीक्षा दी और पहले प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंचा और अपनी दम पर किए गए दूसरे प्रयास से आईपीएस बन गया। उन्होंने कहा कि गुरू दिशा बता सकता है चलना आपको ही पड़ेगा। उन्होंने छात्र छात्राओं को अखबार पढ़ने का तरीका बताया। उन्होंने अपने जीवन के साथ साथ प्रेरक प्रसंगों से भी मोटिवेट किया और भरोसा दिलाया कि जो कठिनाई छात्र छात्राओं की पढाई से संबंधित होगी उनको अवकाश के दिन दूर करने की कोशिश करूंगा और प्रशिक्षु दोनों डीएसपी भी करेगें। 
    प्रशिक्षु डीएसपी सतीश साहू ने छात्र छात्राओं को परखने के साथ साथ मुख्य परीक्षा में लिखने का तरीका बताया और निरंतर पढते रहने के लिए प्रेरित किया।
    इसी तरह यश बिजोरिया ने कांफीडेंस, सपष्ट लेखन के साथ साथ साक्षात्कार के लिए खुद के बारे में जानकारी होना आवश्यक बताया।
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