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    बालों का झड़ना कई बीमारियों का प्रारंभिक संकेत


    मुंबई06/अगस्त/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> क्या आपको लगता है कि बालों का झड़ना कुछ ऐसा है जिसकी आप परवाह नहीं करते  हैं? अगर ऐसा है तो आप गलत हो सकते हैं। पिछले साल, डॉ. बत्रा’ज ने जेनो होम्‍योपैथी को लॉन्‍च किया – जो जेनेटिक परीक्षण्‍ के लिए भविष्‍यवाणी करने वाली नई तकनीक है, और जेनेटिक्स विज्ञान के साथ संयुक्त रूप से तैयार किया गया होम्योपैथी उपचार है। इसके लिए विभिन्न बीमारियों के लिए 24,000 से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया, जिसमें से 10,000 से अधिक परीक्षण बाल झड़ने वाले रोगियों के किये गये थे।

                            परिणामों के अनुसार, बालों का झड़ना या तो कई बीमारियों (जैसे टाइप 2 डायबिटीज यानी मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म और पीसीओएस) या पोषण संबंधी कमियों का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। शुरुआती चरण में इन्हें ठीक करने से न केवल बीमारियों को प्रकट होने से रोका जा सकता है, बल्कि झड़े हुए बालों को भी बहाल किया जा सकता है।
    5,800 से अधिक पुरुषों और 4,500 से अधिक महिलाओं के बालों के झड़ने के एक सैम्‍पल साइज में:
                             74% पुरुष और 71% महिलाएं डायबिटीज मेलिटस के जोखिम के दायरे में थीं। दूसरी ओर, 79% पुरुषों और 74% महिलाओं को हाइपोथायरायडिज्म का खतरा था। हैरानी की बात यह है कि 30% से कम उम्र की 84% महिलाओं के साथ 56% पुरुषों में एनीमिया के शुरुआती लक्षणों का पता चला। अगर खून की इन कमियों को दूर किया जाता है, तो इन व्यक्तियों में तीन महीने की अवधि में बालों को फिर से उगाने की संभावना है।
                              परीक्षणों ने यह भी संकेत दिया कि 30 वर्ष से अधिक उम्र की 94% महिलाओं में ओमेगा 3 फैटी एसिड की कमी थी, जबकि 75% पुरुष विटामिन बी 12 की कमी से पीड़ित थे।
                          डॉ. बत्रा’ज के जेनेटिक परीक्षणों के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए; द ट्राइकोलॉजिकल सोसाइटी, लंदन के प्रथम भारतीय ट्राइकोलॉजिस्ट और वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, डॉ. बत्रा’ज ग्रुप ऑफ कंपनीज, डॉ. अक्षय बत्रा ने कहा कि  “बालों का झड़ना कॉस्मेटिक नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल समस्या है और बालों के 10,000 रोगियों से मिले नतीजे इस तथ्य को रेखांकित करते हैं। हम हमेशा से ही हेयर टेक्नोलॉजी में इनोवेशन लाने में सबसे आगे रहे हैं और अपने मरीजों को दुनिया भर में उपलब्ध बेहतरीन हेयर फॉल ट्रीटमेंट देने की कोशिश की है। हम 24,000 से अधिक जेनो होम्योपैथी परीक्षण कर चुके हैं और एक वर्ष में बालों से संबंधित समस्‍याओं से ग्रसित 10,000 से अधिक रोगियों के जीवन को बदला है।”
                                   पद्मश्री से सम्‍मानित और प्रख्यात होम्योपैथ डॉ. मुकेश बत्रा ने कहा कि “यह बहुत अच्छा है कि हमारे मरीज शुरुआती अवस्था में ही बीमारियों की पहचान करने और इलाज कराने के लिए उत्सुक हैं, जिससे आगे चलकर अधिक स्वास्थ्य लाभ के नतीजे सामने आते हैं। मैं हमेशा से दृढ़ विश्वासी रहा हूँ कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। अगर हम एक देश के रूप में अपने लोगों की बेहतर निवारक देखभाल करना शुरू करते हैं, तो हमारे पास एक मजबूत और अधिक सक्षम राष्ट्र होगा।” डॉ. मुकेश बत्रा ने एलोपेसिया के कारणों, लक्षणों, स्वयं सहायता सुझावों और सुझाए गए उपायों के बारे में जानकारी दी है, जिसे आप निम्‍नलिखित लिंक पर देख सकते हैं: https://bit.ly/2KpbVVc
                                      न्यूयॉर्क स्‍थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं के अनुसार, वैज्ञानिकों ने आठ जीनों की पहचान की है जो एलोपेसिया बीमारी से जुड़े हो सकते हैं। पहचाने गए जीन भी कई ऑटोइम्यून विकारों से जुड़े होते हैं, जिनमें डायबिटीज मेलेटस और रुमेटाइड ऑर्थराइटिस यानी संधिशोथ गठिया शामिल हैं। इसलिए बालों के झड़ने का उपचार करके, विशेष रूप से इन विशेष जीनों को लक्षित करके ऑटोइम्यून विकारों का इलाज किया जा सकता है, जिनमें एलोपेसिया के साथ ही डायबिटीज मेलेटस, संधिशोथ शामिल हैं।

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