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    छात्र-छात्राओं के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं :राज्यपाल टंडन


    भोपाल16/अक्टूबर/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा है कि छात्र-छात्राओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और उनको संरक्षण देने वाले, दोनों ही समाज के अपराधी हैं। परीक्षा परिणामों में विलम्ब अक्षम्य अपराध है। राज्यपाल ने कहा है कि आगामी सत्र में शैक्षणिक कैलेण्डर लागू नहीं करने वाले विश्वविद्यालय दंड के भागी होंगे। श्री टंडन आज राजभवन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के विकास के लिये किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा कर रहे थे। ज्ञातव्य है कि राज्यपाल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा उच्च शिक्षा गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की माईक्रो लेवल मॉनीटरिंग पर बल दिया है। इसी तारतम्य में तीन-तीन विश्वविद्यालयों के समूह गठित कर बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
                                     राज्यपाल टंडन ने कहा कि जो निर्णय किये जायें, उनका अनिवार्य पालन सुनिश्चित किया जाये। विश्वविद्यालयों द्वारा कुछ सेमेस्टर परीक्षा परिणाम निर्धारित समयावधि में घोषित नहीं किये जाने पर राज्यपाल ने अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कुलपतियों को आगाह किया की अगले शिक्षा सत्र में यदि परीक्षा परिणाम नियत तिथि पर घोषित नहीं किये गये, तो जिम्मेदारी निर्धारित कर कार्रवाई की जायेगी। राज्यपाल ने कहा कि कुलपति छात्र-छात्राओं के अभिभावक हैं। उनके हाथों छात्र-छात्राओं का भविष्य बिगड़े, यह घोर अपराध है। कुलपति की उपलब्धियाँ तभी मान्य होंगी, जब विश्वविद्यालय के बुनियादी कार्य और व्यवस्थायें उत्कृष्ट हों। उन्होंने कुलपतियों से विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं का आत्मवलोकन कर जवाबदारी के साथ व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने को कहा है।
                               श्री लालजी टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा स्वपोषित कोर्सेस प्रारंभ करने पर कोई रोक नहीं है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जो कोर्स प्रारंभ किये जायें, वे भविष्य में भी बिना किसी आर्थिक सहयोग के चलें। इसी तरह, संस्थान द्वारा नवाचार के जो कार्य किये जाएँ, उनके फ्रन्ट और बैक हैन्ड स्पोर्ट की व्यवस्थाएँ भी सुनिश्चित हों। उन्होंने कहा कि जो है, जैसा है, यह प्रवृत्ति अनुचित है। नये वर्ष में इस प्रकार का आचरण और सोच स्वीकार्य नहीं होगा। नया वर्ष नई शैक्षणिक संस्कृति का वर्ष होगा, जिसमें विश्वविद्यालय विद्यार्थी के सम्पूर्ण जीवन निर्माण के केन्द्र होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायतत्ता तभी संभव हो सकती है, जब विश्वविद्यालयों की दृष्टि और इच्छाशक्ति में उसका महत्व दिखाई दे।
                                  राज्यपाल ने कहा कि लक्ष्य निर्धारण और समय पर परिणाम प्राप्त करना अनिवार्य है। निर्णय का पालन नहीं हो, यह उन्होंने सीखा ही नहीं है। इसे वह सहन भी नहीं कर सकते। उन्होंने आगाह किया कि परिणाम देना कुलपतियों का दायित्व है। परिणाम नहीं देने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुलपति का सम्मान बना रहे, यह राज्यपाल की जवाबदारी है। कुलपति का सम्मान उनके आचरण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्थाएँ और प्रबंधन पारदर्शी हो। इसमें गड़बड़ी करने वालों के लिये कड़े दंड की व्यवस्था हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें कोई हीला-हवाली नहीं चलेगी।
                                    राज्यपाल टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय समग्र शिक्षा के केन्द्र बनें, जहाँ विद्यार्थियों को सैद्धांतिकता के साथ ही व्यवहारिक ज्ञान भी प्राप्त हो। विश्वविद्यालयों में वर्तमान की समस्याओं और प्रमुख चुनौती के समाधान की शिक्षा और अनुभव मिले। विश्वविद्यालय इसका मॉडल बनें। सौर ऊर्जा का उपयोग, जल पुनर्भरण, पौधा रोपण, कचरा निष्पादन और प्राकृतिक खेती के कार्य विश्वविद्यालयों द्वारा किये जायें। विश्वविद्यालय गांवों में प्राकृतिक खेती, स्वच्छता और पर्यावरण के कार्यों के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करके अर्थ व्यवस्था के बड़े क्षेत्र कृषि की समस्या के समाधान का मार्ग प्रशस्त करें। प्राकृतिक कृषि में जैविक खाद और जैविक कीट नाशकों का निर्माण गौवंश के गोबर, मूत्र और विषैली वनस्पतियों से होता है। बीज भी खरीदना नहीं पड़ता। उत्पाद का मूल्य भी रसायनिक खेती के उत्पादन से अधिक मिलता है। फलत: बिना लागत के अधिक आय की यह पद्धति कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। साथ ही रसायनिक तत्वों के अंधा-धुंध उपयोग से होने वाले दुष्परिणामों से मानवता और पर्यावरण को बचाती है।
                                  राज्यपाल ने कहा कि भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए व्यवसायिक उपयोग वाले वृक्षों का पौधारोपण करना चाहिए। इससे कुछ ही वर्षों में बैंकों की तुलना में बहुत अधिक निवेश वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि जल पुनर्भरण के कार्यों से आसन्न जल संकट की संभावनाओं का सामना करने में मदद मिलेगी। कूड़े से खाद और ऊर्जा के प्रयोग जहाँ एक ओर जैव खाद आपूर्ति के स्त्रोत बनेंगे, वहीं दूसरी ओर रसायनिक उर्वरकों से होने वाले घातक प्रभावों से मानवता और मिट्टी का संरक्षण होगा। सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से विद्युत व्यय की बड़ी धनराशि की नियमित बचत होगी।
                                   बैठक में जीवाजी विश्वविद्यालय, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय और अवधेशप्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने विश्वविद्यालय द्वारा नैक ग्रेडिंग, गुणवत्ता सुधार, परिसर प्रबंधन के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
                                   इस अवसर पर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री हरिरंजन राव, राज्यपाल के सचिव श्री मनोहर दुबे, जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति सुश्री संगीता शुक्ला, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति श्री के.डी. मिश्रा और अवधेशप्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति श्री पीयूष रंजन अग्रवाल उपस्थित थे।


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