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    डेढ़ दर्जन रेतखदानें शुरू होने की खबर से भ्रष्टाचारियों की बांछें खिली 

    भिण्ड12/अक्टूबर/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>> रेत पर खो-खो और हु-तू-तू के बयानों के बाद एक बार फिर बंद पड़ी रेत खदानों के शटर उठाने की तैयारी है। इस खबर से भ्रष्टाचार की गलबहियों को ठुमके लगाने का मौका मिला है। सवाल यह है कि इस बार रेत खदानें शुरू होने के बाद पूर्व की तरह ही सत्ता की नाक के नीचे भ्रष्टचार की धूल जनता की आंख में झौंकी जाएगी, या फिर पाक-साफ तरीके से इन खदानों का संचालन कराया जाएगा। असल में विगत दिवस खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई के द्वारा जारी किए गए उस आदेश के बाद यह सवाल खड़े हुए हैं, जिसमें दो तरह की रेत खदानों को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए है। इस आदेश  में निजी भूमि व पंचायतों के अधीन आने वाली उन रेत खदानों को शुरू कराने को कहा गया है, जिन्हें 30 जून 2019 से पूर्व पर्यावरण विभाग की अनुमति प्राप्त हो चुकी है। जिले में ऐसी करीब ड़ेढ दर्जन खदानें है जो इस नियम के तहत शुरू कराने की स्थिति में हैं, जबकि सूत्रों की माने तो इसकी आढ़ में इतनी ही अतिरिक्त खदानें अवैध रूप से संचालित की जा सकती है, लेकिन इस पर उचित मॉनिटरिंग कराने का क्या प्लान है इस पर खुलकर कोई बोलने तो तैयार नहीं है।
    मंत्री के आरोप के बाद ब्रेक लैश कारोबार पर लगे थे इमरजेंसी ब्रेक
                      अगस्त माह में सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने जिले के थानेदारों से लेकर आईजी तक को रेत के अवैध कारोबार में लिप्त बताकर रेत पर रार छेड़ दिया था। इन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष के मंत्री के समर्थन में विपक्ष के नेता भी खड़े हो गए थे। उस वक्त मामला इतना गर्माया था कि जिले में ब्रेक लैश हो चुके रेत के अवैध कारोबार पर इमरजेंसी बे्रक लगाने पड़े थे। अब जब दुबारा से बंद खदानों को शुरू करने की तैयारी है, तो मंत्री डॉ. सिंह पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है कि अब दुबारा रेत का अवैध कारोबार बे्रक लैश न हो जाए। इसके लिए मंत्री को स्वयं मॉनिटरिंग करनी होगी, ताकि दुबारा से जनता के सामने अवैध उत्खनन न रोक पाने के चलते उन्हें माफी मांगने न उतरना पड़े।
    क्या पूर्व की तरह रहेगा पुलिस का दखल
                      हाल में बेशक दो तरह की रेत खदानों को शुरू करने की तैयारी है, लेकिन सवाल यह भी हैं कि लंबे वक्त तक रेत पर बरती गई सख्ती के बाद जब दुबारा खदानें शुरू होने जा रही हैं, तो क्या पूर्व की तरह इस बार भी इसमें पुलिस का दखल रहेगा, या फिर जरूरत पडऩे पर खनिज विभाग के द्वारा पुलिस से सहयोग मांगने पर ही पुलिस दखल देने उतरेगी। इस तरह का सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पूर्व में रेत पर पुलिस का दखल इस तरह हावी रहा कि पुलिस पर इस अवैध धंधे में लिप्त होने के आरोप लगते रहे। अब देखना है कि करीब डेढ माह चली सख्ती के बाद अब जब खदानें दुबारा शुरू होने वाली हैं तो क्या पुलिस अपने ऊपर लगे इन दाग को मिटाने के प्रयास करेगी या नहीं।
    कलमकारों को भी रहना होगा सचेत
                         रेत के अवैध कारोबार में कलमकारों पर भी संलिप्त होने के आरोप लगते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पत्रकारों को इस अवैध कारोबार में प्रलोभन देकर इसलिए आमंत्रित किया जाता है, ताकि अंधाधुध तरीके से चलने वाले इस कारोबार का सच जनता के सामने न आ सके। पूर्व में इसी योजना पर माफिया और गठजोड़ में लिप्त अधिकारी काम करते थे और अब दुबारा इसी योजना के बल पर पत्रकारों को इसमें खींचने का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन पूर्व से ही इसके प्रति पत्रकारों को सचेत हो जाना चाहिए, ताकि रेत का काला कारोबार दुबारा से पैर पसारे तो उसे जनता और सिस्टम के सामने रखने में संकोच न करना पड़े।
    17 खदानें वैध रूप से की जा सकती है शुरू
                       खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक करीब 17 खदानें ऐसी बताई गईं हैं, जिन्हें वैध रूप से शुरू कराया जा सकता है, जिनमें 15 रेत खदान ग्राम पंचायत को हस्तांतरित, जबकि 2 निजी भूमि पर स्वीकृत खदानें बताई गईं हैं। जिला खनिज अधिकारी आरपी भदकारिया का कहना है कि निजी भूमि पर स्वीकृत खदानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है और इनकी संख्या में 2 की वजाये तीन से चार तक पहुंच सकती है। ऐसे में आने वाले तीन से चार दिन के भीतर जिले की वैध रूप से करीब ड़ेढ दर्जन खदान शुरू होने वाली हैं।
    नई रेत खदानों की नीलामी में लग सकता है दो माह का वक्त
                       खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य शासन की नई रेत नीति के मुताबित नई रेत खदानों की निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने में करीब दो माह का वक्त लग सकता है, ऐसे में इस अवधि में रेत आपुर्ति के लिए निजी व पंचायत के अधीन आने वाली रेत खदानों को शुरू करने की बात कही है। उन्होंने प्रदेश के सभी कलेक्टर को निजी व पंचायत के अधीन आने वाली दोनों क्षेणी की खदानों को शुरू कराने के लिए खदानों की जानकारी व अनुशंसा सहित आवश्यक दस्तावेज व रिपोर्ट बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं।

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