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    मलेरिया नियंत्रण की दिशा में सभी प्रकार के उपाय सुनिश्चित करें- कलेक्टर


    श्योपुर, 25/अप्रेल/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>  कलेक्टर श्री बसंत कुर्रे ने कहा है कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप अधिकांश देखने को मिलता है। जिसके कारण सर्दी और कंपन के साथ बुखार, उल्टी एवं सरदर्द के अलावा शरीर में थकावट व कमजोरी महसूस होती है। यह सब वाक्या डेंगू मच्छर के काटने से परिलक्षित होता है। इसलिए, मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य एवं नगरीय निकाय संयुक्त अभियान चलाकर सभी प्रकार के उपाय सुनिश्चित करें। जिससे मच्छरों की पैदावार से होने वाले बुखार से लोगों को निजात मिलेगी। वे आज कलेक्टर कार्यालय श्योपुर के सभागार में विश्व मलेरिया दिवस पर आयोजित अंतरविभागीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 
                   कार्यशाला में सीएमएचओ डाॅ. एनसी गुप्ता, सहायक आयुक्त आजाक श्रीएलआर मीणा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास श्री रतन गुडिया, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्री रिशु सुमन, सिविल सर्जन डाॅ. आरबी गोयल, नगर पालिका के सीएमओ श्री ताराचंद धूलिया, मिली हेल्पइण्डिया परियोजना के जिला समन्वयक डाॅ. संतोष भार्गव, अन्य विभागीय अधिकारी, ब्लाॅक मेडिकल आॅफिसर, चिकित्सक उपस्थित थे। 
               कलेक्टर श्री बसंत कुर्रे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा जाकर चोक नालियों में पानी भराव की निकासी नगरीय निकायों के माध्यम से सुनिश्चित की जावे। जिससे मच्छरों की पैदावार रूकेगी। साथ ही नालियों का गंदा पानी बाहर निकलकर दूरस्थ जगहों पर जाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के जलभराव वाले स्थानों पर मलेरिया रोधी दवाई डाली जावे। साथ ही तालाबों में जहां पानी रूकता हैं। वहां गंबूजिया मछली डालकर मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने की कार्यवाही मलेरिया अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में पूरी प्लानिंग के साथ कार्यवाही की जावे। जिसमें ग्रामीण अंचलों के अलावा अरबन एरिया को फोकस किया जावे। जिसमें नगरीय निकायों के सीएमओ एवं मलेरिया अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिसका निर्वहन निरंतर किया जावे। उन्होंने कहा कि फोगिंग मशीन के माध्यम से मच्छरों को भगाने और मारने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जावे। इस कार्यवाही से मलेरिया नियंत्रण की परिकल्पना साकार होगी। 
                  सीएमएचओ डाॅ. एनसी गुप्ता ने कार्यशाला में अवगत कराया कि मलेरिया के लक्षण मुख्यतः शरीर में सर्दी व कंपन के साथ तेज बुखार आने पर तुरंत रक्त की जांच कराई जावे। इस जांच में मलेरिया की पुष्टी होने पर पूरा उपचार लिया जावे। खाली पेट दवा नहीं ली जावे। मलेरिया हेतु खून की जांच व उपचार सुविधा समस्त शासकीय अस्पतालों में निःशुक्ल उपलब्ध है। 
                    एस्प्रेड परियोजना फेमिलि हेल्प इण्डिया निःस्वार्थ संस्था के जिला समन्वयक डाॅ. संतोष भार्गव ने कार्यशाला में स्लाइड के माध्यम से मलेरिया नियंत्रण के लक्षण, उपाय बताए साथ ही डेंगू व मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की पैदावार रोकने के संबंध में जानकारी दी। 
    मलेरिया नियंत्रण की दिशा में उपाय
                   कलेक्टर श्री बसंत कुर्रे की अध्यक्षता में आयोजित अंतरविभागीय कार्यशाला में मलेरिया नियंत्रण की दिशा में उपाय बताए गए। जिसमें सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, घर के आस-पास के गढ्ढो को भरने एवं टीमोफाॅस, मिट्टी का तेल या जला हुआ इंजर आॅइल के साथ घर एवं आस-पास की अनुपयोगी सामग्री में पानी जमा होने से रोकने, सप्ताह में एक बार अपने टीन, डिब्बा, कूलर इत्यिादी का पानी खाली करने, पानी के बर्तन को ढककर रखने के साथ हैंडपंप के पास पानी एकत्रित न होने के उपाय शामिल है। 

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