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    छात्र छात्राओं ने समझा अरस्तू का दर्शन

    श्योपुर 04/जुलाई/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>खटीक समाज के सामूदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग में बड़ौदा नायब तहसीलदार एनके दादौरिया ने बताया कि पाश्चात्य दर्शन में प्लूटो के शिष्य अरस्तू को एक महान दार्शनिक के रूप में स्वीकारा जाता है। जिसकी शिक्षाएं प्लूटो से मेल नहीं खाती है। लेकिन उसकी शिक्षाओं का आधार प्लूटो ही था। अरस्तू ने राजनैतिक दर्शन के अलावा अनेक क्षेत्रों में काम किया है। जैसे जीव विज्ञान, राजनीति तथा अनेक सामाजिक विषयों पर शोध किया।
                        नायब तहसीलदार एनके दादौरिया ने बताया कि अरस्तू ने प्रयत्यो की यथार्थ सत्ता को स्वीकारा, न कि अलौकिक। उसके अनुसार सभी प्रत्यय वस्तु के अंदर ही विध्यमान है, पर लौकिक जगत में नहीं। अरस्तू ने अपने सद्गुण की अवधारणा के दो तत्वों माने है नैतिक व बौद्धिक। किसी भी व्यक्ति द्वारा वासना, भावना का नियमन करना ही नैतिक सद्गुण है।
                        बौद्धिक सद्गुण का अर्थ है कि दार्शनिक एवं वैचारिक जीवन पर आधारित जीवन में बौद्धिक तर्कों का होना बहुत आवश्यक है। वासनाएं एवं भावनाओं (क्रोध, मान, ईर्ष्या, लोभ) पर संयम संभव है। इन पर संयम किये बिना बौद्धिक सद्गुण प्राप्त नहीं किया जा सकता है। बौद्ध उच्च कोटिका दर्शन है। अतिशय त्याग व अतिशय भोग मानव जीवन का शुभ नहीं है। बल्कि सभी क्रिया कलापों में मध्यम अवस्था का होना ही सार्थक है। अरस्तू ने गौतम बुद्ध के मध्यम मार्ग को स्वीकार किया। प्रत्यय की पूर्णतावादी नीति शास्त्र का प्रयोग किया।
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