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    प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दो शाखाओं में बंट जाता है मानसून - भूगोल विशेषज्ञ विकास सोनी

    श्योपुर 20/जुलाई/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com>>खटीक समाज के सामूदायिक भवन पर सहभागिता से संचालित एमपीपीएससी निःशुल्क कोचिंग पर भूगोल विशेषज्ञ विकास सोनी ने लेक्चर देते हुए कहा है कि भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण पश्चिम मानसून दो शाखाओ में विभाजित हो जाती है पहली अरब सागर की शाखा और दूसरी बंगाल की खाड़ी की शाखा। अरब सागर की शाखा  भारत के पश्चिनी तट, पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश के कुछ हुस्सो में वर्षा करती है। इसकी पहली शाखा पश्चिमी तट से टकराकर पश्चिमी तटीय मैदान में 250 सेंटीमीटर वर्षा करती है इसकी दूसरी शाखा नर्मदा और तापी से होकर वर्षा करती है और इसकी तीसरी शाखा उत्तर पूर्वी दिशा में अरावली पर्वत से होकर गुजरती है लेकिन समानांतर होने के कारण वर्षा नही करती है बंगाल की खाड़ी की शाखा गारो खासी जयन्तिया पहाड़ी भागो में काफी मात्रा में वर्षा करती है और इसकी दूसरी शाखा हिमालय से होकर गुजरती है और दोनों शाखाये उत्तर पश्चिमी भारत में मिलती है। शरद ऋतु सिंतबर से नवम्बर तक होती है जिससे लौटते मानसून से भारत के पूर्वी भाग में वर्षा करती है जिसमे ओड़िसा, आंध्र प्रदेश ,तमिलनाडु और केरल के भागों में वर्षा होती है। इसे मानसून का पत्यावर्तन कहते है। भारत के मानसून का 74 प्रतिशत भाग दक्षिण पश्चिम मानसून से होती है और मानसून पश्चात 13 प्रतिशत, मानसून पूर्व 10 प्रतिशत और 3 प्रतिशत वर्षा लौटते मानसून से होती है। मानसून की दोनों शाखाओ में अरब सागर की शाखा ज्यादा शक्तिशाली होती है अरब सागर की शाखा द्वारा 65 प्रतिशत आद्रता जबकि बंगाल की खाड़ी की शाखा के द्वारा 35 प्रतिशत आद्रता का इस्तेमाल वर्षा के लिए होता है। भारत के पश्चिमी राजस्थान का क्षेत्र , लेह लद्दाख़ का क्षेत्र कम वर्षा का क्षेत्र है जबकि पश्चिमी घाट के पश्चिमी क्षेत्र , अंडमान निकोबार और उत्तर पूर्वी भाग में 200 सेंटीमीटर से ज्यादा वर्षा प्राप्त होती है।
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