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    खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान - गूंजा नारा ‘‘हमने चेचक मारी है, अब खसरा-रूबेला की बारी है’’


    बून्दी (KrishnaKantrathore) @www.rubarunews.com>> गंभीर बीमारी खसरा-रूबेला को देश से मिटाने के लिए सोमवार को बून्दी सहित पूरे राजस्थान में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ। अभियान के दौरान नौ माह से 15 वर्ष आयु तक के बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों व मदरसों में लगाया गया और उन्हें प्रमाण-पत्र भी दिए गए। यह अभियान आगामी करीब एक माह तक जारी रहेगा। पहले दिन जिला मुख्यायल पर लिटिल एन्जेल स्कूल व संस्कृत विद्यालय में सीएमएचओ डॉ. जी0एल0मीणा, आरसीएचओ डॉ. जे0पी0मीणा ने अभियान की शुरूआत की।
    सीएमएचओ डॉ. जी0एल0मीणा ने अभियान को लेकर जानकारी दी और कहा कि इसके लिए समुचित एक्शन प्लान बनाकर काम किया जा रहा है। आज से शुरू हाए अभियान में नौ माह से 15 साल तक की उम्र के बच्चों को निजी व सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मदरसों सहित ईंट भट्टों व ढाणियों में खसरा-रूबेला का टीका लगाया जा रहा है। इस टीके से बच्चों में जन्मजात बीमारी दूर होगी। खसरा-रूबैला का टीका एक बहुत सुरक्षित टीका है तथा पिछले 40 वर्षो से इसका उपयोग किया जा रहा है। भारत में खसरा रोग के कारण प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार बच्चों की मौत हो जाती है। 
    सीएमएचओ डॉ. जी0एल0मीणा ने बताया कि इस दौरान बच्चों से रूबरू होते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह टीकाकरण सबके लिए जरूरी है, क्योंकि हमें देश से इस बीमारी को समूल नष्ट करना है। इससे पहले हमने सफल टीकाकरण अभियानों के जरिए ही पोलियो व चेचक जैसी गंभीर बीमारियों को खत्म कर चुके हैं। जरूरी है कि बच्चों का स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों सहित अन्य निर्धारित स्थलों पर टीकाकरण हो जाए क्योंकि कोई भी टीम घर-घर नहीं पहुंचेगी। यह टीका उन बच्चों के लिए भी लगेगा जिनके पहले नियमित खसरा या बूस्टर टीका लग चुका है। सोमवार को टीका दाएं हाथ पर बारीक सूई से लगाया गया, जिस कारण दर्द महसूस नहीं हुआ और बच्चे मुस्कुराते हुए नजर आए। अभियान को लेकर बच्चों में उत्साह देखते ही बन रहा है। अभियान के सफल संचालन को लेकर सीएमएचओ डॉ. जी0एल0मीणा, आरसीएचओ डॉ. जे0पी0मीणा सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड में जाकर निरीक्षण किया और व्यवस्थाएं देखी।
    अभियान प्रभारी डॉ. जे0पी0मीणा ने बताया कि यह टीका अवश्य लगवाएं क्योंकि खसरा एक जानलेवा एवं तीव्र गति से फैलने वाला खतरनाक संक्रामक रोग है। यह रोग प्रभावित रोगी के खांसने व छींकने से फैलता है। इसके प्रभाव से बच्चों में निमोनिया, दस्त एवं मस्तिष्क में संक्रमण जैसी घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है। यह रोग नवजात शिशुओं एवं बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण भी है। उन्होंने बताया कि जिले में खसरा के मरीज सामने आते रहते हैं इसलिए जरूरी है कि हम सामूहिक रूप से अभियान में टीके लगवाएं ताकि इस बीमारी को पोलियो की तरह समूल नष्ट किया जा सके। यह तभी संभव है जब हर बच्चे के टीका लगे और कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।


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