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    अध्यापकों को भारी पड़ा बदलाव चौथे सप्ताह में भी आया आधा-अधूरा बजट

    श्योपुर (rubaru desk) @www.rubarunews.com>>प्रदेश में सत्ता के बदलाव से तहस-नहस हुए सेटअप के असर से कोई क्षेत्र अछूता नहीं है। आलम यह है कि सरकार के बदलाव बड़ी भूमिका निभाने वाले अपना सर धुनने पर मजबूर हैं। इन्हीं में शामिल है शिक्षा विभाग, जहां भर्राशाही व्याप्त है। प्रमाण है विभागीय अमले का बजट। जो सरकार की वित्तीय दयनीयता ही नहीं नीयत को भी उजागर कर रहा है। जून माह की तरह जुलाई में भी विभाग के लिए बजट माह के आखिरी हफ्ते में जारी हुआ है। विडम्बना की बात यह है कि यह बजट भी अधूरा आया है। जिसकी वजह से तमाम अध्यापक आर्थिक क्लेश भोगने पर विवश हैं। महीने के अंतिम सप्ताह तक वेतन जो तरसते इन अध्यापकों जो अगस्त के बजट पर भी भरोसा नहीं है। शर्म की बात यह है कि इस विसंगति पर कोई कर्मचारी संगठन खुलकर सामने नहीं आया है। वहिं न्याय और जनहित की बात करने वाले जनप्रतिनिधि भी मौन साधे बैठे हैं। जून माह के वेतन से वंचित अध्यापकों को पिछले एरियर का भुगतान हो पाना भी खटाई में है। देखना यह है कि कंगाली की कगारी पर पहुंचे अध्यापकों के लिए बजट कब तक आ पाता है?
    संविलियन के नाम पर की गई मनमानी
                विभागीय सूत्रों के मुताबिक बजट में कटौती संविलियन के नाम पर की गई है। जबकि इस प्रक्रिया में गतिरोध की वजह निरंकुश अफसरशाही और नियमों की जटिलता है। उल्लेखनीय है कि तमाम अध्यापकों के संविलियन की कार्रवाई विभिन्न कारणों से अब तक अधूरी है।
    डीडीओ के वेतन रोकने तक के हौं निर्देश
                शिक्षकों और अध्यापकों के वेतन भुगतान में बाधा की स्थिति में डीडीओ के वेतन  को रोकने तक के आदेश हैं। बावजूद इसके अफसर अपना वेतन महीने की पहली तारीख को आहरित कर रहे हैं। परेशान अध्यापकों को यह तक नहीं बताया गया है कि उनके लिए बजट क्यों नहीं दिया गया है?
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