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    क्रेयॉन ने ‘स्पॉट द फेक’ का अनावरण किया


    नईदिल्ली(rubarudesk) @www.rubarunews.com>> आज की दुनिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स कंटेन्ट और सूचना के उपभोग का केन्द्र बन गये हैं। महज एक बटन को क्लिक करने पर बेहद आसानी से सारी जानकारी मिल जाती है, और इसने लोगों की जिंदगी को बदलकर रख दिया है। यह सरलता एक वरदान सिद्ध हुई है, लेकिन सूचना के सही उपयोग और उपभोग के लिहाज से इसके उपयोग में जिम्मेदारी का भाव भी होना चाहिये। इस चुनौती को देखते हुए क्रेयॉन-एलएक्सएल आइडियाज ने डिजिटल साक्षरता की कार्यशाला ‘स्पॉट द फेक’ लॉन्च की है, जिसमें कोका-कोला इंडिया ने भी सहयोग किया है।
                डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण कार्यशाला ‘स्पॉट द फेक’ सितंबर से लेकर नवंबर तक स्कूलों में शिक्षकों और अभिभावकों के लिये संचालित की जाएगी, ताकि उन्हें जानकारी साझा करने वाले मंचों के रूप में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग समझाया जा सके। यह पहल हमारे सभी मूल्यवान उपभोक्ताओं को साझा सूचना की विश्वसनीयता जाँचने का महत्व बताने के लिये है, जिनमें अपने शिक्षकों और अभिभावकों से सीखने वाले लोग भी शामिल हैं।
                 क्रेयॉन-एलएक्सएल आइडियाज के प्रबंध निदेशक एवं चीफ लर्नर श्री सैयद सुल्तान अहमद ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया के जरिये हमारे पास भारी मात्रा में सूचनाएं आती हैं। चुनौती यह है कि किस पर विश्वास करें और किस पर नहीं। सूचना में अंतर करना और फर्जी तथा सही सूचना को पहचानना एक अनिवार्य कुशलता है, जो हमारे बच्चों में होनी चाहिये। हमारी शिक्षा प्रणाली को परीक्षाओं में विद्यार्थियों के आकलन से आगे बढ़ना चाहिये। उन्हें सूचना के विश्लेषण एवं अंतर की कुशलता देना आधुनिक युग की मांग है।’’ 
                    इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कोका-कोला इंडिया एवं साउथ वेस्ट एशिया में पब्लिक अफेयर्स, कम्‍यूनिकेशंस एवं सस्‍टेनेबिलिटी के वाइस प्रेसिडेन्ट इश्तियाक अमजद ने कहा, ‘‘डिजिटल दुनिया तेजी से बढ़ रही है और सूचना की भारी मात्रा के कारण कंटेन्ट की विश्वसनीयता को परखना कठिन है। इसलिये हम क्रेयॉन को शिक्षकों के लिये डिजिटल साक्षरता कार्यशाला में सहयोग दे रहे हैं। इस पहल के माध्यम से हम आज के युग में हमारे उपभोक्ताओं को उपलब्ध सूचना की विश्वसनीयता जाँचने का महत्व बताना चाहते हैं।’’
                   यह बेहतरीन डिजिटल कार्यशाला वास्तविक जीवन के विभिन्न उदाहरणों के जरिये हमारे पास आने वाली सूचना के प्रभाव पर प्रकाश डालेगी, जिन्‍हें हम अक्सर इसकी विश्वसनीयता को परखे बिना साझा कर देते हैं।
    क्रेयॉन-एलएक्सएल आइडियाज के विषय में
                     क्रेयॉन, एलएक्सएल आइडियाज का एक ब्राण्ड है, जो प्रभावी आयोजनों और स्कूल संपर्क कार्यक्रमों की परिकल्पना तथा आयोजन द्वारा विद्यार्थी जीवन के महत्व में वृद्धि करता है। यह बड़े पैमाने की सीएसआर परियोजनाओं की तैयारी और निष्पादन भी करता है, जो शिक्षा के क्षेत्र में अर्थपूर्ण सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
                    क्रेयॉन ने 15 वर्षों में 20 देशों में 200 से अधिक बड़े प्रारूप वाले आयोजन किये हैं, जिन्‍होंने  125,000 स्कूलों के 40 मिलियन विद्यार्थियों को प्रभावित किया है।
    कोका-कोला इंडिया के विषय में
                     कोका-कोला इंडिया देश की अग्रणी पेय कंपनियों में से एक है, जो उपभोक्ताओं के लिये स्वास्थ्यवर्द्धक, सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता के, तरोताजा करने वाले पेय विकल्पों की पेशकश करती है। वर्ष 1993 में अपने पुनःप्रवेश के बाद से कंपनी पेय उत्पादों से उपभोक्ताओं को तरोताजा कर रही है, जैसे कोका-कोला, कोका-कोला ज़ीरो, डाइट कोक, थम्स अप, थम्स अप चार्ज्ड, थम्स अप चार्ज्ड नो शुगर, फैन्टा, लिम्का, स्प्राइट, माज़ा, वियो “फ्लेवर्ड मिल्क”, मिनट मेड रेन्ज ऑफ ज्यूसेस, मिनट मेड स्मूथी और मिनट मेड विटिंगो, हॉट और कोल्ड चाय और कॉफी विकल्‍पों की जॉर्जिया श्रृंखला, एक्वैरियस और एक्वैरियस ग्लूकोचार्ज, श्वीप्‍स, स्मार्ट वाटर, किनले और बोनएक्वा पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और किनले क्लब सोडा। कंपनी अपने खुद के बॉटलिंग परिचालन और अन्य बॉटलिंग पार्टनर्स के साथ, करीब 2.6 मिलियन रिटेल दुकानों के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों उपभोक्ताओं के जीवन का हिस्सा बन चुकी है, जिसकी प्रति सेकंड 500 सर्विंग्स की दर है। इसके ब्राण्ड देश में सबसे चहेते और सबसे अधिक बिकने वाले पेयों में शुमार हैं- थम्स अप और स्प्राइट, सबसे अधिक बिकने वाले दो स्पार्कलिंग पेय हैं। 
                   कोका-कोला इंडिया का सिस्टम 25,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 150,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। भारत में कोका-कोला सिस्टम सामुदायिक पहलों के माध्यम से स्थायी समुदाय निर्मित करने में छोटा-सा योगदान दे रहा है, जैसे सपोर्ट माय स्‍कूल, वीर, परिवर्तन, और उन्नति और कंपनी पर्यावरण पर अपने द्वारा होने वाले प्रभाव को स्वयं कम करती है।


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