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    विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा

    नईदिल्ली 08/नवम्बर/2019 (rubarudesk) @www.rubarunews.com >> सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी है। साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए अयोध्या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने को कहा है। वहीं, कोर्ट में निर्मोही अखाड़ा के सभी दावे खारिज हो गई है।
                          चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुबह 10.30 बजे अपना फैसला सुनाना शुरू किया। सीजेआई ने कहा बाबर के समय मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी। 1949 में दो मूर्तियां रखी गई थी। बाबरी मस्जिद हिंदू स्ट्रक्चर के ऊपर बनाई गई। यह मस्जिद समतल स्थान पर नहीं बनाई गई।
                       एसआई की खुदाई में मंदिर के साक्ष्य मिले है। सीजेआई ने कहा की खुदाई के साक्ष्यों को अनदेखा नहीं कर सकते हैं। खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले थे। सीजेआई ने यह भी कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू वहां राम चबूतरे और सीता रसोई पर पूजा होती रही थी। ऐसे में कोर्ट ने विवादित स्थल का अंदरूनी और बाहरी चबूतरा ट्रस्ट को देने का अदेश दिया।
                      सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना  दावा साबित नहीं कर पाया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंग्रेजों के वक्त नमाज के कोई सबूत नहीं हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ढांचे को गिराना कानून व्यवस्था का उल्लंघन. कोर्ट ने यह माना कि हिन्दू अंग्रेजों से पहले वहां पूजा किया करते थे.सीता रसोई और राम चबूतरा के सबूत मिले. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 18वीं सदी तक भी नमाज का कोई सबूत नहीं मिला. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिमों को अलग जमीन देना का आदेश दिया गया है.
    सीजेआई ने कहा है कि एएसाई की खुदाई में जो चीजें मिली हैं उसे हम खारिज नहीं कर सकते हैं। आस्था और विश्वास पर कोई सवाल नहीं है। सीजेआई ने कहा श्रीराम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था इसमें कोई शक नहीं है। ऐसे में रामलला को कानूनी मान्यता दी जाती है।
                       एएसाई की रिपोर्ट के मुताबिक खुदाई में जो ढांचा मिला वह  मस्जिद का नहीं था.इसके साथ ही एएसआई की रिपोर्ट में ईदगाह और मस्जिद का जिक्र नहीं है. इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि 1949 में 2 मूर्तियां रखी गईं थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने का जिक्र नहीं मिला है. एएसआई  की रिपोर्ट के मुताबिक गुंबद के नीचे मंदिर के अवशेष मिले हैं.
                         सीजेआई ने कहा कि 1856 से 57 तक उस स्थान पर हिंदुओं को पूजा करने से रोका नहीं गया था। सदियों से हिंदुओं द्वारा वहां पूजा किए जाना यह साबित करता है कि उनका विश्वास है उस स्थान पर रामलला विराजमान है। सीजेआई ने कहा कि बाहरी प्रांगण में हिंदू पूजा करते रहे हैं।


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