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    नियम विरुद्ध संचालित हो रहे पेथोलॉजी सेन्टर-अप्रशिक्षित लोग कर रहे जांच


    भिण्ड01/दिसम्बर/2019 (rubarudesk ) @www.rubarunews.com >> जिले में ऐसे कई पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं जहां पैथोलॉजिस्ट व योग्य प्रशिक्षित कर्मी नहीं हैं, इतना ही नहीं कई का तो स्वास्थ्य विभाग में कोई रिकॉडऱ् ही नहीं है। इसके बाद भी इन पैथोलॉजी लैब पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। चर्चा है कि अफ्सरों की सह पर फर्जी रूप से पैथोलॉजी सेन्टरों का संचालन हो रहा है। आलम यह है कि अप्रशिक्षित स्टाफ यहां खून, पेशाब व अन्य जांच करने में लगा है और इनके द्वारा दी जाने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। जबकि इसके घातक परिणाम सामने आते रहे है, फिर भी फर्जी रूप से संचालित होने वाली पैथोलॉजी पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि मामले की गंभीरता को स्वमं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समझने का दावा करते हैं लेकिन कार्रवाई की जहमत नहीं उठा पाते हैं। मरीजों की जान आफत में डालने में लगे हुए हैं जिसके बाद जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे सह पाकर इनके हौंसले बुलंद हैं और धड़ल्ले से उल्टी-सीधी जांचकर मरीजों को थमाई जा रही है जिसके बाद भी उन्हें आराम नहीं मिलता तो ग्वालियर जाकर जांच करने पर सही रिपोर्ट मिलती है जबकि भिण्ड की रिपोर्ट ग्वालियर के डॉक्टर देखना भी पसंद नहीं करते और इन जांचों को रद्दी की टोकरी में फेंक दी जाती है, जिसके बाद अफ्सर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
    यह कहता है नियम
                    पैथोलॉजी लैब चलाने के लिए एमडी पैथोलॉजी डॉक्टर का होना जरूरी है। इसी को आधार बनाकर स्वास्थ्य विभाग रजिस्ट्रेशन करता है। बिना चिकित्सक के लैब चलाना अवैध है, साथ ही यहां प्रशिक्षित कर्मचारी का होना भी जरूरी है लेकिन जिले में बड़ी तादात में इन नियमों की अंदेखी कर पैथोलाजी लैब संचालित हो रही हैं। जबकि बिना इन मानकों का पालन किए लैब चलाना अपराध है फिर भी इनकी अंदेखी की जा रही है।
    कर्मचारी कर रहे जांच
                    शहर में पैथोलाजी लैब सिर्फ बाजार में ही नहीं बल्कि कई नर्सिंग होम में भी नियम विरूद्ध संचालित है और यहां पैथोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में नर्सिंग होम संचालक अपने कर्मचारियों से ही यहां मरीजों की जांच करा कर न सिर्फ रिपोर्ट तैयार कराते हैं, बल्कि मरीजों का इलाज भी इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है, जिससे आराम नहीं मिलता तो मजबूर होकर ग्वालियर व दिल्ली के लिए भागना पड़ता है तब जाकर मरीजों को मर्ज से राहत मिलती है।
    जोखिम में ड़ाल रहे जान
                    आलम यह है कि अप्रशिक्षित लोगों द्वारा की जा रही जांच रिपोर्ट पर डॉक्टर मरीजों दवाएं लिखते हैं और ऐसे में मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसा नहीं है कि इसकी सिर्फ आशंका जाहिर की जा रही हो, बल्कि इसके दुष्परिणाम पूर्व में देखने को मिलते रहे हैं। इतने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा इस मामले को नजर अंदाज करने में लगा है।
    जानकर भी नहीं कर रहे कार्रवाई
                    फर्जी रूप से संचालित होने वाली पैथोलॉजी लैब के संचालकों की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ बताई जाती है और इसी वजह से इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती हैं। यह पूरा मामला विभाग की नजर में है लेकिन जानबूझ कर विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे बड़े स्तर से लेनदेन का मामला है इस वजह से पैथोलॉजी सेन्टर निर्भीक होकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
    कार्रवाई का होता दिखावा
                      ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में कार्रवाई नहीं करता है, कार्रवाई होती है लेकिन वह पूरी तरह से दिखावा मात्र बनकर रह जाती है। देखा गया है कि विभाग के अधिकारी इन पैथोलॉजी पर कार्रवाई करने जाते है पर खाना पूर्ति कर वापस हो लेते हैं और चंद दिनों में ही फिर इन पैथोलॉजी के ताले खुल जाते हैं और पूर्व की तरह बिना रोक टोक इनका संचालन शुरू हो जाता है।

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